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बीएड् की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी करने वाले तीन अध्यापक बर्खास्त वेतन

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जिले में भी बीएड की फर्जी डिग्री पर तीन शिक्षक नौकरी करते मिले हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने बीएड की फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी हथियाने वाले तीनों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया है। इन शिक्षकों ने भीमराव अंबेडकर विवि आगरा के नाम से वर्ष 2004-05 में बीएड की फर्जी डिग्री हासिल की थी। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और वेतन और भत्तों की रिकवरी करने का निर्देश दिया है।
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जिले के कालाकांकर विकास खंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय कड़रो में तैनात सहायक अध्यापक सुभाषचंद्र , संडवा चंद्रिका विकास खंड के प्राइमरी स्कूल आशापुर भाटन में तैनात सहायक अध्यापक अरुण कुमार मिश्र और सांगीपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल भुड़हा में सहायक अध्यापक पद पर तैनात विशाल प्रताप सिंह की बीएड की डिग्री फर्जी मिलने पर बीएसए ने बर्खास्त कर दिया है।
शासन स्तर पर गठित एसआईटी की जांच में भीमराव अंबेडकर विवि आगरा के नाम से वर्ष 2004-05 में जारी बीएड की डिग्री फर्जी निकली थी। इसके बाद निदेशक के निर्देश पर बीएसए ने यह कार्रवाई की है। बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया कि तीनों शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। साथ ही वित्त एवं लेखाधिकारी को पत्र लिखकर वेतन और भत्ते के रूप में दी गई धनराशि की रिकवरी के लिए कहा गया है।
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फर्जी डिग्री पर साढ़े सात साल की नौकरी
साढ़े सात साल से फर्जी बीएड की डिग्री पर नौकरी करने वाले तीन शिक्षकों का फर्जीवाड़ा विभाग नहीं पकड़ पाया। नौकरी मिलने के बाद विभाग ने डिग्री का सत्यापन कराने के बाद ही वेतन का भुगतान किया था। साढ़े सात साल से वेतन लेने वाले एक शिक्षक को प्रमोशन भी मिल गया था।
संडवा चंद्रिका विकास खंड के प्राइमरी स्कूल आशापुर भाटन में तैनात अरुण कुमार मिश्र और सांगीपुर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल भुड़हा में तैनात विशाल प्रताप सिंह को बेसिक शिक्षा विभाग में दो फरवरी 2013 को नौकरी मिली थी। जबकि, कालाकांकर विकास खंड के मिडिल स्कूल कड़रो में तैनात सुभाषचंद्र को 29 सितंबर 2015 में नौकरी मिली थी। साढ़े सात साल में विभाग में तैनाती पाने वाले शिक्षकों का अभिलेख कई बार जांचा गया और वेतन भुगतान के पहले सत्यापन भी कराया गया। सब कुछ ओके मिलने पर ही वेतन का भुगतान किया था। अचानक शासन ने फर्जीवाड़े का जो भंडाफोड़ किया, उससे तीनों फर्जी शिक्षकों की असलियत सामने आ गई। विभाग ने पहले आरोपी शिक्षकों को नोटिस जारी किया था। बाद में शासन का दबाव बढ़ते ही बीएसए ने तीनों को बर्खास्त कर दिया है।
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