जिला कारागार से भले ही माफिया अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ के हत्यारोपी लवलेश, अरुण व सनी का चित्रकूट जेल स्थानांतरण हो गया है, लेकिन यहां की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में अब कटौती नहीं होगी। मुख्य गेट तक पहुंचने के लिए लोगों को पीएसी व सिविल पुलिस के बाद जेल के बंदीरक्षकों की निगरानी से ही गुजरना होगा।
प्रयागराज में माफिया अतीक व उसके भाई अशरफ की 15 अप्रैल को हत्या करने वाले तीनों आरोपियों को पहले नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया था। सप्ताह भर बाद तीनों को प्रतापगढ़ कारागार स्थानांतरित कर दिया गया था। उनके जेल में दाखिल होते ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। जेल के चारों ओर सुरक्षाकर्मियों की पिकेट लगाई गई थी।
यहां तक कि मुख्य गेट तक जाने के पहले ही छोटा गेट बना दिया गया था। वहां जांच के बाद ही कोई आगे निकलता था। यहां पर पीएसी भी तैनात कर दी गई थी। जेल चौकी के पुलिसकर्मी भी आने जाने वाले लोगों की निगरानी करते हैं। अभी भी प्रशासनिक आधार दूसरे जनपदों से भेजे गए छह शातिर जेल प्रशासन के लिए सिरदर्द बने हैं।
जेल अधीक्षक रमाकांत दोहरे ने बताया कि जेल की सुरक्षा पूर्ववत रहेगी। माफिया ब्रदर्स के हत्यारोपियों के चित्रकूट स्थानांतरण के बाद किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। बाहरी लोगों की तीन स्थानों पर जांच के बाद प्रवेश मिलेगा।
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जेल के बाहर प्रधान बंदीरक्षक की हो चुकी है हत्या
जिला कारागार में तैनात प्रधान बंदीरक्षक हरि नारायण त्रिवेदी की 27 दिसंबर 2018 की शाम जेल रोड हत्या कर दी गई थी। हत्या को अंजाम देने के बाद बाइक सवार तीन बदमाश खीरीबीर घाट की ओर भाग निकले थे। हालांकि बाद में कोतवाली पुलिस ने घटना का खुलासा करते हुए मकसूद, अतीक को जेल भेजा। घटना की साजिश जेल में बंद जैद पर लगा था।