पूर्वांचल विकास निधि के तहत हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी अब पूर्वांचल विकास बोर्ड करेगा। जिले में पहली बार दखल करते हुए एग्रो के स्थापित हैंडपंपों की गुणवत्ता की जांच कराने का फैसला लिया गया है। जिले के अधिकांश माननीयों की निधि के 3.30 करोड़ रुपये से हैंडपंपों की स्थापना की गई है। मगर अब एग्रो गुणवत्ता की जांच कराने सेे कतरा रहा है।
जिले के सात विधायक और चार एमएलसी को पूर्वांचल विकास निधि से मिलने वाली धनराशि से हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता की जांच अन्य एजेंसियों से कराई जाएगी। सूबे में पूर्वांचल विकास बोर्ड का गठन होने के बाद जिले में पहली बार आए बोर्ड के उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने वर्ष 2018-19 में एग्रो को हैंडपंप लगाने के लिए मिले 3.30 करोड़ रुपये से स्थापित हैंडपंपों की गुणवत्ता खंगालने के लिए जलनिगम को जिम्मेदारी सौंपी है। मगर एग्रो जांच से कतरा रहा है।
ऐसा पहली बार हो रहा है कि पूर्वांचल विकास निधि से हुए कार्यों की गुणवत्ता खंगालने की पहल हो रही है। हालांकि कागजी कोरम पूर्ण करने के लिए जांच का कोरम पूरा कर लिया जाता था। दरअसल, इस निधि से होने वाले सभी विकास कार्य माननीयों के प्रस्ताव पर ही कराए जाते हैं और वह जैसा कार्य चाहते हैं, कार्यदायी संस्थाएं वैसा ही कर देती हैं। इससे गुणवत्ता की न तो कहीं शिकायत होती है और न ही कोई पहल होती है। मगर सूबे के मुखिया ने पूर्वांचल विकास बोर्ड का गठन करके कार्यदायी संस्थाओं पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है।
पूर्वांचल विकास निधि के तहत होने वाले विकास कार्यों में अनियमितता मामला कभी भी सामने नहीं आया। जिले स्तर पर होने वाली बैठकों में भी सार्वजनिक तौर पर माननीयों ने भी कभी कोई मुद्दा नहीं उठाया। पूर्वांचल विकास निधि के तहत बजट हर वर्ष आता है, मगर पहली बार गुणवत्ता की जांच कराने की पहल हुई है।