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Pratapgarh News: मेडिकल कॉलेज में वेंटीलेटर तो हैं, पर सांसें देने में नाकाम

Mon, 21 Aug 2023 09:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
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प्रताप बहादुर चिकित्सालय में बंद कोविड वार्ड। संवाद
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बेहोशी के डॉक्टर, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी से मरीज, तीमारदार परेशान
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। कोविड काल में करीब दो वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज में एलटू हॉस्पिटल तैयार किया गया था। यहां गंभीर मरीजों के लिए 25 बेड का आईसीयू बनाया गया था। ढ़ाई करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर 16 वेंटीलेटर भी खरीदे गए थे। अब वेंटीलेटर ताला बंद कमरे में शोपीस बने हैं। ये वेंटीलेटर आईसीयू में भर्ती मरीजों को सांसें देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। हालत यह है कि गंभीर मरीजों को तीमारदार दूसरे शहर के अस्पताल ले जाने को मजबूर हैं। वहां इलाज का खर्च उनकी जेब पर भारी पड़ रहा है।
डॉ. सोने लाल पटेल मेडिकल कॉलेज के राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में सस्ता और बेहतर इलाज होने का भरोसा लेकर आने वाले गंभीर मरीजों को लखनऊ, प्रयागराज के अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। कारण यह है कि डॉक्टर से लेकर फार्मासिस्ट की जानकारी में 16 वेंटीलेटर मशीनें हैं। जबकि सीएमएस डॉ. रमेश पांडेय का दावा है कि वेंटीलेटर और भी हैं। मगर संख्या उन्हें भी याद नहीं है। उन्होंने कहा कि बेहोशी के डॉक्टर और प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ ऑपरेटरों की कमी है। इस वजह से वेंटीलेटर का लाभ गंभीर मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। इसका खामियाजा मरीज ही नहीं तीमारदार भी भुगत रहे हैं।
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सीएमएस ने कहा, दो प्रकार के होते हैं वेंटीलेटर
इनवेसिव और नॉन-इनवेसिव दो प्रकार के वेंटीलेटर होते हैं। सीएमएस ने बताया कि इनवेसिव वेंटिलेटर के लिए मरीज को एक ट्यूब वायुमार्ग में रखा जाता है। या फिर गर्दन में बने छेद के माध्यम से डाला जाता है। इन वेंटिलेटरों को मैकेनिकल वेंटिलेटर भी कहा जाता है, और ये रोगी की सांस लेने में मददगार साबित होते हैं। इनका उपयोग आम तौर पर तब किया जाता है जब कोई मरीज अपने आप सांस नहीं ले पाता है। उन्होंने बताया कि इसके संचालन के लिए बेहोशी के डॉक्टर और सर्जन वार्ड में मौजूद रहते हैं। इस समय इनवेसिव वेंटीलेटर का संचालन मेडिकल कॉलेज में नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि नाॅन इनवेसिव वेंटीलेटर प्रत्येक एमबीबीएस से लेकर चेस्ट रोग विशेषज्ञ को प्रशिक्षण दिया गया है। यदि किसी मरीज को सांस लेने में दिक्कतें होती है तो उसे तत्काल वेंटीलेटर पर रखकर इलाज किया जाता है। इसके अलावा हाई फ्लू नेजल कोनुला वेंटीलेटल है। आईसीयू में आने वाले मरीजों को इसका लाभ मिल रहा है।

हादसे में घायलों को किया जाता है रेफर
वेंटीलेटर मशीन चलाने के लिए ऑपरेटर न होने के कारण हादसे में घायल हो या फिर ब्रेन हैमरेज के मरीज को वेंटीलेटर का लाभ नहीं मिल रहा है। चिकित्सक ऐसे मरीजों को प्रयागराज रेफर कर देते हैं।
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कुछ स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण के लिए प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल भेजा गया है। इनके प्रशिक्षण लेकर आने के बाद अन्य स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। जरूरत पड़ने पर मरीज को तत्काल वेंटीलेटर वाले बेड पर भर्ती कर इलाज किया जा सके।
- डॉ. रमेश पांडेय, सीएमएस।

प्रताप बहादुर चिकित्सालय में बंद कोविड वार्ड। संवाद

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