जिले में बीते तीन माह के भीतर हेपेटाइटिस बी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। तीन माह के भीतर जिले में 43 लोग इस असाध्य बीमारी से पीड़ित मिले हैं। जिला कारागार में बंद छह बंदी भी पीड़ित मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी सूचना निदेशालय को भेजने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
जिला जेल की क्षमता 458 बंदियों की हैं लेकिन, वर्तमान समय में यहां 1123 बंदी हैं। इस कारण जेल में अव्यवस्थाएं भी तमाम हैं। जिला जेल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं है। मार्च 2020 में स्वास्थ्य विभाग ने जेल में बंदियों की स्क्रीनिंग की थी। इस दौरान कुछ बंदियों में हेपेटाइटिस बी के लक्षण मिले थे। इस पर उनकी जांच कराई गई। इसके बाद उनमें हेपेटाइटिस बी की पुष्टि हुई।
मरीजों के संबंध में सूचनाएं स्वास्थ्य निदेशालय को भेजने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने उनका इलाज शुरू कर दिया। जेल में छह मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया। इसके बाद मार्च से मई तक जिले में हेपेटाइटिस बी के 43 मरीज मिले। सीएमओ ने शासन को मामले से अवगत कराया। इसके बाद शासन की तरफ से मरीजों के लिए दवाएं मुहैया कराई गईं। गौर करने वाली बात यह है कि हेपेटाइटिस बी का इलाज काफी महंगा है।
अभी तक जिले के सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज उपलब्ध नहीं था। हाल ही में शासन ने मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस के इलाज की सुविधा शुरू की है। डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. मनोज खत्री ने बताया कि जिले में मिले हेपेटाइटिस बी के मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है।
इन कारणों से फैलता है हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी दूषित पानी, भोजन का सेवन करने के साथ ही असुरक्षित यौन संबंध बनाने और संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़ाने तथा संक्रमित सिरींज का इस्तेमाल करने से होता है। लीवर पर बेहद बुरा प्रभाव डालने वाली यह बीमारी वायरस के कारण होती है। राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. मनोज खत्री का कहना है कि हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। यह बीमारी लीवर को संक्रमित करती है। इसके कारण लीवर में सूजन और जलन पैदा होती है। समय से इलाज न होने पर यह कैंसर का रूप ले लेती है। नियमित दवा खाने से कैंसर का खतरा कम होता है। हेपेटाइटिस बी और सी की दवाएं सरकारी अस्पतालों में आ रही हैं।
हेपेटाइटिस बी के मरीजों का ऑपरेशन करने में भी होती है परेशानी
हेपेटाइटिस बी के मरीजों का जल्द ऑपरेशन नहीं किया जाता है। दरअसल, इनके ऑपरेशन के दौरान प्रयोग में आने वाले ओटी के सामान को डिस्पोज कर दिया जाता है। हेपेटाइटिस बी के मरीज के ऑपरेशन के बाद 24 घंटे तक ओटी को लॉक कर दिया जाता है। जिससे वायरस फैलने का खतरा न रहे।
जिला जेल में हेपेटाइटिस बी के छह मरीज मिले हैं। जबकि जिलेभर में जांच कराने पर कुल 43 लोगों इसकी पुष्टि हुई है। मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज में शासन ने इसके इलाज की सुविधा उपलब्ध करा दी है। -डॉक्टर एसके सिंह, एसीएमओ