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Pratapgarh News: बेल्हा के हथगोले से धुआं हो गई थी ब्रिटिश हुकूमत, खड़े हो गए थे कान

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कभी जंगलों से घिरा मतुई नमकशायर गांव देश की आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों का ठिकाना हुआ करता था। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे देशभक्त यहां आकर रुकते थे। यहां बम की फैक्टरी थी, जहां से क्रांतिकारियों तक पहुंचाई जाती थी।
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रानीगंज तहसील के मतुई नमकशायर गांव के लाला मथुरा प्रसाद राजा पटियाला के मुंशी हुआ करते थे। आजादी की क्रांति तेज हुई तो मथुरा प्रसाद भी क्रांतिकारियों का सहयोग करने लगे। पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. श्याम शंकर श्याम बताते हैं कि यहां तैयार किया गया बम क्रांतिकारियों की अलग-अलग टोली तक पहुंचाया जाता था। देशभक्त इन्हीं बमों के सहारे अंग्रेजों से लोहा लेते थे।

ब्रिटिश प्रशासन की टीम ने कई बार यहां छापेमारी भी की, लेकिन क्रांतिकारी उनके हाथ नहीं लगे। हालांकि, गांव के कई लोगों को पुलिस उठाकर ले गई, लेकिन तब तक उन पर देशभक्ति एवं क्रांति का रंग चढ़ चुका था, किसी ने भी जुबान नहीं खोली।
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काकोरी एक्शन की तैयार हुई थी रूपरेखा
प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर डॉ. पीयूष कांत शर्मा का कहना है कि मतुई नमकशायर गांव का इतिहास स्वर्णिम है। आजादी की लड़ाई के दौरान यहीं से ही काकोरी कांड की रूपरेखा तैयार की गई थी। चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह सहित क्रांतिकारी विषम परिस्थिति में यहां ठहरते थे। यहां बम भी बनाए जाते थे, जो क्रांतिकारियों तक पहुंचाए जाते थे।
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