Sowing to buy potato seeds for fifty rupees, now farmers in shock due to fall in prices
प्रतापगढ़। भाव गिरने के कारण आलू की खेती करने वाले किसानों को तगड़ा झटका लगा है। मुनाफा तो दूर अब उन्हें लागत निकालना भी भारी पड़ रहा है। किसानों ने अक्तूबर महीने के आखिरी सप्ताह में पचास रुपये किलो आलू का बीज खरीदकर बुवाई की थी। अब बाजार में फुटकर में आलू सात से 10 रुपये किलो बिक रहा है। इससे किसानों की बैचैनी बढ़ गई है।
जिले में इस बार आलू की खेती का दायरा बढ़ा है। दरअसल, बीते साल अक्तूबर-नवंबर में आलू के दाम में रिकार्ड वृद्धि हुई थी। खुले बाजार में आलू पचास रुपये किलो बिका था। किसानों ने महंगे दाम पर आलू का बीज खरीदकर बुवाई की थी। किसानों को इससे अच्छी कमाई की उम्मीद थी। यही कारण था कि जिले में आलू की खेती का दायरा एक हजार हेक्टेयर बढ़ गया। जिले में साढ़े आठ हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की गई। मौसम अनुकूल रहने से पैदावार भी अच्छी हुई है, मगर खोदाई के समय आलू का भाव काफी नीचे चला गया है। इससे किसानों को निराशा हाथ लगी है।
मानधाता के गौरा गांव निवासी किसान विभव सिंह चौहान ने इस बार 12 बीघे खेत में आलू की बुवाई की है। उन्होंने बताया कि एक बीघे खेत में आलू की फसल तैयार करने में करीब 70 हजार लागत आई है। मौजूदा समय में आलू बाजार में 7 से 10 रुपये किलो बिक रहा है। थोक में व्यापारी इससे भी कम दाम में ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक बीघे खेत में 75- से 80 क्विंटल आलू की पैदावार होती है। इस हिसाब से लागत भी निकल पाना मुश्किल है। रानीगंज के शिवगढ़ ब्लाक के भटपुरवा गांव के किसान रामसहोदर मिश्र ने बताया कि बीज महंगा होने के कारण महज एक बीघे खेत में आलू की बुवाई की थी। जिसमें करीब 70 हजार लागत आई है।
अब खुदाई के वक्त आलू के दाम गिरने से मुश्किल खड़ी हो गई है। बुढ़ौरा गांव के किसान नौसाद अहमद, पचरास के मासूक अहमद ने बताया कि अब फरवरी माह पर निगाहें टिकी हैं। यदि दाम बढ़े तो थोड़ी राहत मिलेगी, वरना घाटा उठाना पड़ेगा। जिला उद्यान अधिकारी अनिल दुबे ने बताया कि आलू की फसल इस बार अच्छी है। दाम बढ़ने की उम्मीद है।