फेसबुक पर वायरल पत्र और वीडियो।
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सीसीटीवी कैमरे तोड़ डाले। सभी को धमकाते हुए भगा दिया। पीड़ित दिव्यांग युवती साथ रहने वाले भाइयों के साथ मदद के लिए पुलिस चौकी से लेकर कोतवाली तक गुहार लगाती रही लेकिन उसकी शिकायतों पर पुलिस गंभीर नहीं हुई। इससे क्षुब्ध होकर रविवार की सुबह करीब दस बजे ब्यूटी पार्लर की दुकान पर पहुंची कंचन ने फांसी लगाकर जान दे दी। जानकारी मिलने पर रोते बिलखते परिजन भागकर पहुंचे।
आक्रोशित लोगों ने प्रयागराज- अयोध्या राजमार्ग पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंची चिलबिला चौकी प्रभारी समेत पुलिसकर्मियों को दौड़ा लिया। बवाल देख आसपास की दुकानें लोगों ने बंद कर दीं। खबर मिलने पर कोतवाली पुलिस पहुंची। अफरा-तफरी के बीच लोगों ने आरोपियों के शोरूम पर पथराव कर दिया। हालांकि किसी तरह पुलिस लोगों को रोक सकी। घटना से नाराज लोगों ने बाजार की दुकानों को बंद करा दिया। जानकारी मिलने पर एएसपी पूर्वी विद्या सागर मिश्रा, सीओ सिटी करिश्मा गुप्ता, सीओ सदर अमरनाथ गुप्ता भारी भरकम पुलिस के साथ पहुंचे।
आरोपियों की गिरफ्तारी की जिद पर अड़े लोग किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थे। मौके पर पहुंचे एसपी सतपाल अंतिल के सामने परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर आरोपियों से मिलीभगत का आरोप लगाया। बंद दुकानों की बेल्डिंग कटर से काटकर दुकानें खुलवाई गई। सुरक्षा, आरोपियों पर कार्रवाई, 50 लाख रुपये आर्थिक मदद, दुकानों के संचालन के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती व सरकारी नौकरी की मांग पूरी करने के आश्वासन पर जाम छह घंटे बाद समाप्त हुआ। दुकान खुलवाकर पुलिस घटनास्थल की छानबीन की। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्यों को संकलित किया। एएसपी पूर्वी विद्या सागर मिश्रा ने बताया कि तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
मौत से पहले फेसबुक पर बयां किया दर्द, सीएम को लिखा पत्र हो रहा वायरल
फांसी लगाने से पहले कंचन ने फेसबुक पर एक वीडियो बनाकर वायरल किया था। इसमें उसने पूरी घटनाक्रम का ब्यौरा देते हुए बताया कि किस तरह से उसको भू माफिया द्वारा परेशान करते हुए बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। उसने एक पत्र भी वायरल किया है, जो उसने कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री को भेजा था। फेसबुक पर अपलोड वीडियो में कंचन ने भाइयों पर संपत्ति में हिस्सा न देने का आरोप लगाया। बताया जाता है कंचन दिव्यांग थी और ब्यूटी पार्लर चलाकर रोजी रोटी चलाती थी। बंटवारे में उनके भाइयों ने पूरी संपत्ति आपस में बांट ली और उसे हिस्सा नहीं दिया। संपत्ति खरीदने वाले भू माफिया कब्जा पाने के लिए बेदखल करने का प्रयास करने लगे। इसको लेकर काफी विवाद हुआ। पुलिस भी कंचन को दुकान खाली करने के लिए दबाव बना रही थी।