सपने सच होते हैं। बशर्ते उन सपनों को पूरा करने का हौसला होना चाहिए। फिर तो सामने चाहे जितनी चुनौतियां हां राह अपने आप आसान हो जाती है। इन चुनौतियों को स्वीकार करने वाली लखनऊ रेलवे डिवीजन की इकलौती और पहली महिला गार्ड राधा यादव महिलाओं के लिए मिसाल बन गई हैं। घर की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ नौकरी भी पूरी ईमानदारी और शिद्दत से कर रही हैं। उनकी लगन देखने के बाद रेल अफसरों का सैल्यूट करने का मन करता है।
मंगलवार को लखनऊ से मालगाड़ी लेकर प्रतापगढ़ आई राधा यादव को देखने और उनसे बात करने के लिए रेलकर्मी आतुर थे। एक महिला होते हुए भी वह परिवार के साथ-साथ गार्ड की नौकरी भी अच्छे से कर लेती हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने लोगों के मन में उठ रहे इस तरह के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। वर्ष 2007 में रेलवे भर्ती बोर्ड से रेलवे में कदम रखा था। उस समय वह टीएनसी (ट्रेनर्स क्लर्क) के पद पर चयनित हुईं। हाल ही में प्रमोशन पाकर चार महीने पहले गार्ड बन कर मालगाड़ी चला रही हैं।
राधा बताती हैं कि एक महिला होने के नाते गार्ड की नौकरी थोड़ी दिक्कत तलब जरूर है। मगर उन्होंने इसे एक चुनौती समझकर स्वीकार किया है। लखनऊ की रहने वाली राधा यादव की दो संतानें हैं। बच्चे अभी छोटे हैं। पति रंजीत सिंह झांसी रेलवे स्टेशन पर पार्सल बाबू हैं। राधा बताती हैं कि परिवार की जिम्मेदारी उनकी नौकरी के आड़े नहीं आती है। पति का पूरा सहयोग मिल रहा है। उनका मानना है कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के सामने तमाम तरह की चुनौतियां हैं। इससे हारकर उसको घर में नहीं बैठ जाना चाहिए। अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष करना चाहिए।
दिन में ड्यूटी है तो कोई दिक्कत नहीं रहती हैं। मगर महिला होने के नाते में रात के वक्त सुरक्षा के प्रति थोड़ी चिंता जरूर रहती है। मगर उस वक्त भी वह हिम्मत नहीं हारती हैं। राधा बताती है कि इन चार महीनों में कई ऐसे अवसर आए जब रात में मालगाड़ी लेकर जाना पड़ा। रास्ते में वह चौकन्नी रहती हैं। मुंह को रुमाल से ढंके रहती हैं। मगर इसका असर ड्यूटी पर नहीं पड़ा।
स्टेेश्ान अध्ाीक्ष्ाक ने बताया गार्ड राधा एक साहसी महिला हैं। परिवार के साथ-साथ नौकरी का भी दायित्व पूरी जिम्मेदारी से निभा रही हैं। राधा आज की महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। इनको देखकर गर्व होता है।