डॉक्टर की रशियन पत्नी से बात के बाद सुलझा मामला
इस बीच पट्टी के रहने वाले डॉ. आनंद त्रिपाठी से पुलिस अधिकारियों ने संपर्क साधा। पता चला कि उनकी पत्नी रूसीने मकरचियाम रूस के आर्मोनिया की रहने वाली हैं। बोल्गा से उनकी फोन पर बात कराई गई। तब जाकर 15 घंटे से परेशान अफसरों ने राहत की सांस ली। पता चला कि बोल्गा दिल्ली के रहने वाले अपने प्रेमी की तलाश में भटक रही है। प्रेमी उसका पासपोर्ट और वीजा लेकर गायब हो गया था।
अधिकारियों ने रशियन दूतावास से संपर्क करने के बाद बोल्गा की बाबत टेलीग्राम भेजा। उसके पास मिले थैले में रुपये भी थे। रात में गरीबरथ एक्सप्रेस से एक दरोगा और तीन पुलिसकर्मी बोल्गा को लेकर दिल्ली रवाना हुए।शुक्रवार को दिनभर पुलिस उसे लेकर रशियन दूतावास में भटकती रही। बोल्गा के पास जो कागजात थे, वे असली दस्तावेज की छायाप्रति थे। जिसके चलते दूतावास के अधिकारियों ने उसे अपनी सुपुर्दगी में लेने से इनकार कर दिया।
इससे परेशान पुलिस उसे नजदीकी थाने ले जाने लगी तो वह हंगामा करने लगी। वह दूतावास से निकलने के लिए राजी नहीं थी। बाद में नजदीकी थाने की पुलिस पहुंची और उसे जबरन लेकर बाहर आई। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने दिल्ली में रहने वाले किसी परिचित असफर से मदद के लिए कहा। इसके बाद उसे विदेशी पंजीकरण अधिकारी कार्यालय ले जाया गया। यहां से भी महिला की बाबत अभिलेख भेजे गए। खबर लिखे जाने तक पुलिस टीम विदेशी महिला को लेकर इस कार्यालय से उस कार्यालय भटक रही थी।
भारतीय प्रेमी से मिलने तीन साल पहले आई थी दिल्ली
रूसी महिला बोल्गा के मोबाइल में प्रेमी के साथ किए गए चैट मिले हैं। वह दिल्ली के एक युवक के संपर्क में फेसबुक के जरिए आई थी। इसके बाद दोनों के बीच लगातार चैटिंग होती रही। दोनों के प्यार की कहानी भी मोबाइल के चैट में मिली। बोल्गा के अनुसार, मार्च 2019 में वह दिल्ली आई। प्रेमी युवक के साथ वह दिल्ली में रहती थी। इसी साल अचानक बोल्गा का पासपोर्ट व वीजा लेकर प्रेमी गायब हो गया। जिसकी तलाश में वह भटक रही है।
पुलिस के आगे बढ़ा दिए रुपये
अस्पताल में पूछताछ के दौरान रूसी महिला बोल्गा ने अपने थैले ।से करीब एक हजार रुपये निकाले। जिसमें पांच सौ से लेकर 50 रुपये तक के नोट थे। उसने पुलिस के आगे दो सौ रुपये का नोट बढ़ा दिया। ताकि पुलिस उसे अकेला छोड़ दे। उसके पास से पठानकोट से दिल्ली तक का टिकट भी मिला। अब वह किस ट्रेन से यहां आई, इसकी सटीक जानकारी किसी को नहीं थी।
न्यूरो पैथॉलाजिस्ट है बोल्गा
रूसी महिला बोल्गा न्यूरो पैथॉलाजिस्ट भी हैं। आर्मेनिया की रहने वाली रूसीने मकरचियाम से बातचीत के दौरान बोल्गा ने अपने बारे में जानकारी दी। आपबीती सुनाते हुए उसकी आंखों से आंसू निकलते रहे।