जिले की 257 नहरों में 20 जून तक पानी छोड़े जाने का वादा सिंचाई विभाग की ओर से किया गया था। लेकिन, 21 जून बीतने के बाद भी नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया। वहीं, जलापूर्ति का रोस्टर भी बिगड़ गया है। सिंचाई न होने से किसानों की धान की रोपाई पिछड़ रही है। हल्की बारिश और कड़ी धूप की वजह से धान की नर्सरी भी सूख रही है।
शासन के रोस्टर के अनुसार 20 जून से नहरों में पानी छोड़े जाने की बात कही गई थी। लेकिन, निर्धारित समय बीतने के बाद भी नहरें सूखी हैं। निजी नलकूपों से सिंचाई करने पर किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। एक घंटे की सिंचाई के लिए उन्हें 300 रुपये देने पड़ रहे हैं। कुछ किसान नहरों में पानी आने के इंतजार में हैं, ताकि धान की नर्सरी डाल सकें।
जिले में 1.33 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर करीब चार लाख किसान धान की नर्सरी तैयार करने में लगे हैं। अधिशासी अभियंता अरविंद वर्मा ने बताया कि 20 जून से नहरों में पानी छोड़े जाने का रोस्टर जारी किया गया था। जल्द ही सभी नहरों में पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा।