सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के जरिए मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के सरकार के दावे को स्वास्थ्य विभाग पलीता लगा रहा है। जन औषधि केंद्र खोलने के लिए जिले के 19 सरकारी अस्पतालों का चयन किया गया था, लेकिन अभी तक मात्र सात अस्पतालों में ही इसका संचालन शुरू हो सका है।
जिन अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खुले हैं वहां भी पूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। निर्धारित छह सौ दवाओं के मुकाबले मात्र 150 दवाएं ही केंद्रों पर हैं। सर्जिकल उपकरण तो खोजे नहीं मिल रहे हैं।
जिले में संचालित हो रहे जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी पर प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोले जाने थे। इनमें अब तक सिर्फ जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रानीगंज, कुंडा, लालगंज, पट्टी और सांगीपुर सीएचसी में ही जनऔषधि केंद्रों का संचालन शुरू हो सका है।
यहां भी आधी-अधूरी दवाएं ही हैं। जनऔषधि केंद्रों में 600 प्रकार की जेनेरिक दवाएं रखनी हैं, पर जिले के जनऔषधि केंद्रों में इनमें से आधी जरूरी दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल रही हैं। दवाओं की डिमांड नहीं होने का हवाला देकर 350 से भी अधिक जरूरी दवाएं नहीं मंगाई जा रही हैं।
जबकि सभी प्रकार की ब्रांडेड दवाएं कम कीमत में उपलब्ध कराने के लिए यह केंद्र खोले गए हैं। जन औषधि केंद्र के कर्मचारियों का भी कहना है कि 600 प्रकार की जेनेरिक दवाओं के साथ ही सर्जिकल सामान जनऔषधि केंद्र पर होने चाहिए, मगर इन दिनों डेढ़ सौ जेनेरिक दवाएं ही उपलब्ध हैं।
दवाएं नहीं मिलने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि जो दवाएं नहीं बिकती हैं उन्हें नहीं मंगाया जाता है। खराब होने पर नुकसान ही होगा। केंद्र में वही दवाएं मिलेंगी जो नियमित रूप से बिकती हैं।
केंद्रों पर शुगर, बीपी, सर्दी, जुकाम और बुखार के साथ खांसी, आयरन, कैल्शियम ही मौजूद है। गंभीर बीमारियों की दवाओं के साथ ही सर्जिकल सामान जन औषधि केंद्रों पर नहीं हैं।
ज्यादातर जेनेरिक दवाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं। जो नहीं हैं वह प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र पर मिल जाती हैं। बाहर की दवा बेचे जाने की शिकायत नहीं है।
डॉक्टर एके श्रीवास्तव, सीएमओ।