सदर तहसील के बैजलपुर और प्रतापगढ़ सिटी के किसानों को मुआवजे के लिए 30 करोड़ रुपये का इंतजार है। इन गांवों के 316 किसानों की जमीन बाईपास के लिए अधिगृहीत की गई थी। एनएच ने अभी तक 58.12 करोड़ रुपये किसानों को बांटने के लिए जिला प्रशासन को दिए थे।
इसमें भी अभी तक छह करोड़ नहीं बांटे जा सके हैं। यह रकम किसानों को बांटने के बाद ही अगली किश्त जारी होगी। जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक रुपये डंप हैं। संपूर्ण धनराशि का उपभोग नहीं होने से सिटी और बैजलपुर के किसानों को मुआवजे की राशि नहीं मिल पा रही है।
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए गोड़े से कटरामेदनीगंज तक बनने वाले बाईपास के निर्माण में किसानों को मुआवजा नहीं मिलने से बाधा अभी बरकरार है। एनएच ने किसानों को मुआवजा बांटने के लिए जो रकम दी थी, उसका पूरा उपभोग नहीं हो सका है। चालू वित्तीय वर्ष में 58.12 करोड़ रुपये की रकम मिली थी।
जिसमें से 6.48 करोड़ रुपये अभी तक नहीं वितरित हो सके हैं। जिला प्रशासन को मिली धनराशि का सदुपयोग नहीं होने से एनएच ने अभी तक सिटी और बैजलपुर के 316 किसानों के लिए 30 करोड़ रूपये की रकम जारी नहीं की है। मुआवजे का इंतजार करने वाले किसानों को अफसरों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। किसानों का मुआवजा वितरित नहीं होने से बाईपास का निर्माण भी प्रारंभ नहीं हो पा रहा है।
ट्रामासेंटर बनने से खड़ा हुआ विवाद
बाईपास की जमीन पर ट्रामा सेंटर का निर्माण होने से नया विवाद खड़ा हो गया है। जिला प्रशासन ने जिन किसानों की जमीन पहले अधिगृहीत की थी, उन्हें मुआवजा न देकर दूसरे किसानों का चयन कर लिया है। दरअसल, जिस स्थान से बाईपास गुजरना था, वहां ट्रामा सेंटर बन गया है। मगर किसानों को इसका मुआवजा नहीं दिया गया। इससे पहले से चयनित किसानों ने हाईकोर्ट में वाद दायर करके मुआवजे की रकम मांगी है।
जनप्रतिनिधियों ने साध रखी है चुप्पी
बाईपास निर्माण के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साध रखी है। कार्यक्रमों में वह भाषण तो देते हैं, मगर बाईपास निर्माण की चर्चा तक नहीं करते हैं। इससे बाईपास निर्माण की दिशा में कोई पहल नहीं हुई है।
बाईपास में जिन किसानों की जमीन गई है, उन्हें मुआवजा वितरित किया जा रहा है। विवादित मामलों का भुगतान नहीं हो रहा है। 30 करोड़ रुपये का मांगपत्र भेजा गया है। आते ही सिटी और बैजलपुर के किसानों को वितरित किया जाएगा। शत्रोहन वैश्य, एडीएम