गर्मी के साथ ही सब्जियों के दाम भी सहालग में आसमान पर पहुंच गए हैं। महंगी सब्जियों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। उनके दाम में बेतहाशा वृद्धि हुई है। सबसे अधिक टमाटर लोगों की जेब ढीली कर रहा है। थोक कारोबारी महुली मंडी, भुपियामऊ के साथ ही बाहर से आने वाली सब्जियों का रेट निर्धारित नहीं करते। इसका फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं और मनमाने तरीके से रेट लगाया जा रहा है। यह हाल तब है जब बाजार में स्थानीय किसानों की हरी सब्जियां भी आ गई हैं।
गर्मी में जिले के अलावा प्रयागराज और आसपास के जिलों के किसान बड़े पैमाने पर सब्जियां उगाते हैं। मई के दूसरे सप्ताह तक उनकी सब्जियां बाजार में आ जाती हैं। भिंडी, करैला, नेनुआ संग पालक, धनिया की पैदावार जिले में भी होती है। इसके अलावा सोरांव, मऊआइमा व कटरागुलाब सिंह बाजार से थोक मात्रा में सब्जियां महुली मंडी संग भुपियामऊ और जिले के अन्य बाजारों में पहुंचाई जाती हैं।
चूंकि जिले में सब्जियों के दामों का निर्धारण नहीं होता। इसलिए थोक कारोबारियों से सब्जियां लेने के बाद बिचौलिए मनमाना दाम लगाकर फुटकर दुकानदारों को देते हैं। चढ़ाव व उतार वाली सब्जियों को फुटकर दुकानदार भी अपना मुनाफा लेकर बेचते हैं। शहर की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में सब्जियों का भाव सामान्यत: कम होता है। टमाटर छोड़ दूसरी सब्जियों जैसे नेनुआ, करेला, लौकी, परवल और भिंडी के दाम में शहर व गांवों के बीच करीब पांच रुपये (प्रति किलो) का अंतर है, लेकिन मंडियों से बाहर निकलते ही सब्जियों के दाम बेलगाम हो गए हैं।
अंबेडकर चौराहे के पास लगने वाली सब्जी मंडी में रविवार को सब्जी विक्रेता रमेश ने बताया कि टमाटर 50 रुपये, नेनुआ 20 रुपये, भिंडी 20 रुपये, प्याज 20 रुपये, लौकी 20 रुपये करैला 40 व शिमला मिर्च 80 रुपये किलो बिक रहा है। अन्य हरी सब्जियों के दाम लगभग बराबर रहे। सब्जी मंडी में सब्जियों के दाम में भाव एक दो रुपये कम था। बाबागंज व पुराना माल गोदाम रोड सब्जी मंडी में भी अंबेडकर चौराहे की तरह सब्जियां मिल रही थीं।
हर बाजार के भाव में रहता है अंतर
सब्जियों के दाम शहर की अपेक्षा गांव में कम है। शहर में ही सब्जी मार्केट में अलग-अलग रेट देखने को मिलते हैं। यहां तक कि महुली मंडी में दुकानदारों को थोक सब्जी मिलती है। भुपियामऊ की मंडी में भी सुबह थोक सब्जी की बाजार सजती है। कुछ सब्जियों को वजन से बेचा जाता है तो कुछ बोली लगाकर बेची जाती हैं। फुटकर दुकानदार भी अपना मुनाफा निकालने के लिए सब्जियों को उतार चढ़ाव के हिसाब से बेचते हैं।