राधा-कृष्ण की भक्ति को नए सिरे से परिभाषित कर अपनी अलग पहचान बनाने वाले जगद्गुरु कृपालु महराज पौत्र की सियासत में इंट्री चर्चा का विषय बनी हुई है। खुद कृपालु महराज और अभी तक उनके परिवार ने भी राजनीति से दूरी बनाए रखी थी। कृपालु महराज के पौत्र को बसपा ने विश्वनाथगंज विधानसभा से टिकट दिया है।
राधा-कृष्ण की भक्ति व लीला का वर्णन करने वाले जगद्गुरु कृपालु महराज ने देश के साथ ही विदेशों में राधे-राधे की गूंज से लोगों को भक्तिमय बना दिया। लगातार उपदेशों के चलते उन्हें कई उपाधि भी मिली। जनपद ही नहीं देश व विदेश के कोने-कोने में उनके भक्त फैले हुए हैं। उनके धार्मिक व सामाजिक कार्यों को अब उनकी संतानें आगे बढ़ा रही हैं। कुंडा के मनगढ़, मथुरा के बरसाना व वृंदावन के अलावा विदेशों में जगद्गुरु कृपालु महराज के आश्रम हैं। जगद्गुरु कृपालु महराज के ब्रम्हलीन होने के तीन वर्ष बाद भी उनके भक्तों की संख्या में कमी नहीं आई। घनश्याम व बालकृष्ण दोनों बेटे जहां अपने परिवार के साथ लखनऊ व दिल्ली में रहते हैं। वहीं बेटियां विशाखा, कृष्णा व श्यामा पिता की दी गई जिम्मेदारियों का ट्रस्ट के माध्यम से निर्वहन कर रही हैं। उनके पुत्रों ने सियासत से दूरी बनाए रखी और राधे-राधे जपते रहे।
जगद्गुरु कृपालु महराज के पुत्र घनश्याम के छोटे पुत्र प्रेमानंद तिवारी मनु महराज अपने बाबा की ख्याति के बलबूते सियासत में किस्मत अजमाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। बता दें कि जगद्गुरु कृपालु महराज का परिवार विश्वनाथगंज विधानसभा के हंडौर के चंद्रौटा का रहने वाला है। बाद में उनका परिवार मनगढ़ में जाकर रहने लगा। जगद्गुरु कृपालु महराज की ससुराल लीलापुर में थी। कृपालु महाराज के भक्त बड़ी संख्या में विश्वनाथगंज विधानसभा क्षेत्र में रहते हैं। तभी तो प्रत्याशी के रूप में प्रेमानंद के नाम का ऐलान करने आए पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज, सांसद मुनकाद अली व पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय ने प्रेमानंद के नाम के पहले जगद्गुरु कृपालु महराज का नाम लिया। अभी तक धरम-करम से जुड़ा रहने वाले चर्चित परिवार समय का रूख भांपकर सियासत के जरिए समाजसेवा करने का दावा कर रहा है।