मनरेगा के तहत काम करने वालों का पैसा जब से सरकार उनके खाते में भेजने लगी तब से जिम्मेदारों ने योजना पर ध्यान देना ही बंद कर दिया। जनपद की करीब 335 ग्राम पंचायतों में मनरेगा का काम ठप पड़ा है। कार्ययोजना के अभाव में काम न होने से जॉब कार्डधारक मजदूर रोजगार के लिए भटक रहे हैं। ग्राम पंचायत से लेकर ब्लाक स्तर तक तैनात अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे। प्रधानों की उपेक्षा भी मजदूरों के लिए मुसीबत बन गई है।
योजना के तहत काम करने वाले जॉब कार्डधारकों का पैसा पहले ब्लाक से होकर मजदूरों के खाते में जाता था। लूटखसोट पर ब्रेक लगाने के उद्देश्य से सरकार ने इस नियम में परिवर्तन कर दिया। अब पैसा काम करने वाले मजदूरों के खाते में सीधे सरकार भेजती है। ब्लाक व ग्राम पंचायतों को काम करने वाले मजदूरों का दिन वार ब्योरा योजना की साइट पर लोड करना होता है। जानकार बताते हैं कि जब से ये पैसा सीधे मजदूरों के खाते में जाने लगा तब से ग्राम पंचायतें व ब्लाक स्तरीय अधिकारी उदासीन हो गए।
मुख्य विकास अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने पाया है कि बिहार, मानधाता, सांगीपुर, बाबागंज, सदर, बेलखरनाथधाम, संग्रामगढ़ व लक्ष्मणपुर ब्लाक को मिला कर करीब 335 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत काम की स्थिति बेहद खराब है। इन ग्राम पंचायतों में करीब दो माह से काम ठप है। यह देखते हुए उन्होंने सत्रह विकास खंडों में तैनात बीडीओ को चेतावनी पत्र जारी किया है। शनिवार को जारी इस पत्र में उन्होंने सुधार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी है। कहा है कि समय सीमा के अंदर यदि सुधार की स्थिति नहीं दिखती तो वे संबंधित ब्लाक के बीडीओ पर कार्रवाई करेंगे।