शिक्षक अनुुज कुमार पांडेय को दो खातों में वेतन भुगतान के मामले में लेखाधिकारी ने अपने को पाक-साफ बताते हुए खंड शिक्षा अधिकारियों को दोषी बताया है। उन्होंने कहा कि ब्लाकों से आने वाले वेतन बिल बीईओ के माध्यम से आते हैं। अगर उनका तबादला कहीं और हुआ था, तो उन्हें बिल बनाकर नहीं देना था। फिलहाल, विभाग गहराई से मामले की जांच करने में जुट गया है।
शिक्षामित्रों के समायोजन में अनुज कुमार पांडेय को पहली बार अगस्त 2014 में बाबागंज ब्लाक के रामनगर में तैनाती दी गई। बीएसए के औचक निरीक्षण में गायब मिलने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। कुछ ही दिन में उन्होंने बीएसए के पास जुगाड़ लगाकर अपनी तैनाती शिवगढ़ विकास खंड के प्राइमरी स्कूल बीजेमऊ में करा लिया। शिक्षक ने पूर्व में एसबीआई प्रतापगढ़ में खुले एकाउंट की जानकारी विभाग में दी थी। उसी खाते में वेतन आता था। शिवगढ़ ब्लाक में तैनाती होने पर उसने ग्रामीण बैंक लच्छीपुर का एकाउंट नंबर विभाग में दे दिया।
यहां के खाते में भी वेतन भेज दिया गया। इस प्रकार बाबागंज और शिवगढ़ के दोनों बीईओ ने वेतन बिल लेखाधिकारी को भेज दी। लेखा विभाग ने बगैर कोई मिलान किए वेतन भी भेज दिया। मार्च और अप्रैल माह में 57,056 रुपये खाते में भेजे गए। इधर, शिक्षक अनुज पांडेय का कहना है कि ग्रामीण बैंक का खाता नंबर कैसे विभाग में पहुंचा इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक नेता उन्हें बदनाम क रने के लिए अनर्गल दुष्प्रचार कर रहे हैं। इधर लेखाधिकारी रामपाल ने विभाग की गलती को स्वीकार करते हुए खंड शिक्षा अधिकारियों पर आरोप मढ़ा है। उन्होंने बताया कि वेतन बिल बीईओ के माध्यम से ही आता है। मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है, जल्द ही रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।