लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों का भरोसा जीतने के लिए इस चुनाव सभी बूथों पर वीवीपैट मशीन लगाई जाएगी। इससे निकलने वाली पर्ची को मतदाता स्वयं सात सेकेंड तक देख सकेंगे और यह पर्ची पूरी तरह सुरक्षित होगी। अगर, कोई विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है तो ईवीएम की गणना को दरकिनार कर वीवीपैट की पर्ची से गणना की जाएगी। हालांकि, वीवीपैट की पर्ची से गणना के लिए प्रत्याशी को शपथ पत्र देना होगा।
चुनाव आयोग ने इस वर्ष लोकसभा चुनाव में पूरी पारदर्शिता बरतने का प्रयास करना शुरू कर दिया है। आयोग ईवीएम से चुनाव नहीं कराने और बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग करने वाले दलों को शिकायत का कोई मौका नहीं देना चाहता।
इसलिए लोकसभा चुनाव के लिए सभी बूथों पर वीवीपैट मशीनें लगाई जा रही हैं। मतदाता ईवीएम की बटन दबाएगा और ईवीएम से वीप की आवाज निकलने के साथ ही वीवीपैट मशीन से पर्ची निकलेगी, इस पर्ची को मतदाता सात सेकेंड तक देख सकेंगे। इसके बाद यह पर्ची वीवीपैट में बने बाक्स में कटकर गिर जाएगी।
जिले के 2616 बूथों पर लगने वाली वीवीपैट मशीन में मतदाताओं की पर्ची सुरक्षित रहेगी। मतगणना के दौरान अगर कोई प्रत्याशी ईवीएम के मतों की गणना से संतुष्ट नहीं होगा तो वीवीपैट के बॉक्स में जमा पर्ची से मतों की गणना की जाएगी।
इससे प्रत्याशियों के आरोप-प्रत्यारोप की आशंका खत्म हो जाएगी। हालांकि वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सदर विधान सभा के बूथों पर वीवीपैट मशीन लगाई गई थी। मगर मतों की गणना में विवाद नहीं होने के कारण गणना में आवश्यकता ही नहीं पड़ी।
लोकसभा चुनाव में पहली बार वीवीपैट मशीन का प्रयोग किया जा रहा है। इससे मतदाता भी यह देख सकेंगे कि उन्होंने जिसको अपना मत दिया है, उसे मिला है या नहीं। वीवीपैट से निकलने वाली पर्ची में मतदाता का नाम और चुनाव चिह्न अंकित होगा।
शत्रोहन वैश्य, उप जिला निर्वाचन अधिकारी।