कोरोना काल में मजदूरों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ लोग हालात के मारे श्रमिकों की मजबूरी का फायदा उठाने में भी लगे हैं। लॉकडाउन में मुंबई में फंसे बहराइच जिले के दर्जनभर मजदूरों को जब घर आने के लिए कोई रास्ता नहीं दिखा तो उन्होंने पास रहे रुपयों का इंतजाम कर किसी तरह ट्रक से घर पहुंचने का जुगाड़ किया।
ट्रक पर सवार होकर सभी मुंबई से निकले, लेकिन चार-चार हजार रुपये वसूलने के बाद भी उन्हें चालक ने प्रयागराज में ही उतार दिया। अब किसी की जेब में रुपये नहीं बचे थे। वहां से सभी पैदल ही बहराइच के लिए चल दिए। भूखे-प्यासे वह प्रतापगढ़ पहुंचे तो कुछ लोगों ने उन्हें भोजन कराया। इसके बाद वह फिर पैदल ही रवाना हो गए।
बहराइच शहर के रामकुमार, अरविंद, जितेंद्र सहित एक दर्जन से अधिक लोग मुंबई के कल्याण में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे। सभी वहीं आस-पास किराए का कमरा लेकर रहते थे।
25 मार्च के बाद लॉकडाउन के चलते कंपनी बंद होने से उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया। लॉकडाउन के बाद 52 दिन तक किसी तरह उन लोगों ने कमरे में समय बिताया। हालात सुधरते न देख सभी ने घर लौटने का मन बनाया। अरविंद, राजकुमार और जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने कल्याण में एक ट्रक की बुकिंग की।
ट्रक चालक ने सभी से चार-चार हजार रुपये लिए और उन्हें बहराइच पहुंचाने की हामी भरी। करीब चार दिन का सफर तय कर ट्रक चालक उन्हें लेकर मंगलवार को आधी रात प्रयागराज पहुंचा। यहां पहुंचते ही उसका मन बदल गया। उसने बहराइच जाने से इनकार कर दिया। काफी मिन्नत के बाद भी वह तैयार नहीं हुआ और सभी को वहीं उतार दिया।
थक हारकर सभी रात में पैदल ही बहराइच के लिए चल दिए। दोहपर करीब 12 बजे सभी शहर के भगवाचुंगी पहुंचे। भूख-प्यास से उनका बुरा हाल था। उनकी हालत देखकर कुछ लोगों ने भोजन के पैकेट और पानी मुहैया कराया। दोपहर करीब दो बजे के बाद सभी पैदल ही बहराइच के लिए निकल गए।