डेढ़ साल से बाजार में बेची जा रही थी डीएपी खाद
विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों के लिए आने वाली डीएपी करीब डेढ़ साल से बाजार में बेची जा रही थी। यूरिया व डीएपी ढुलाई करने वाले वाहनों का भाड़ा चुकता करने के लिए शुरू हुआ खेल लगातार चलता रहा। धीरे-धीरे ढाई करोड़ रुपये की डीएपी बाजार में बेच दी गई। फरार भंडार नायक से पूछताछ के बाद घोटाले में अफसरों व उसके परिवार के सदस्यों की भूमिका भी सामने आ रही है।
जिले के तीन पीसीएफ गोदामों से करीब ढाई करोड़ रुपये की डीएपी गायब होने की जानकारी के बाद प्रबंधक धनंजय तिवारी ने नगर कोतवाली में भंडार नायक संतोष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद से वह फरार चल रहा था। रविवार की रात पुलिस उसे दबोचने में कामयाब रही। पुलिस सूत्रों के अनुसार, करीब डेढ़ साल से डीएपी बाजार में बेचने का काम चल रहा था। माल ढुलाई करने वाले ठेकेदार वाहनों का किराया देने का दबाव बना रहे थे।
समितियों पर खाद पहुंचाने में हो रहीं दिक्कतों को देखते हुए संतोष ने अपने परिवार व रिश्तेदारों की मदद से कुछ ट्रक खरीदकर ट्रांसपोर्ट बना लिया। बाद में उसी ट्रांसपोर्ट से खाद की ढुलाई कराने लगा। बकाया चुकता करने के लिए गोदाम से डीएपी बाजार में भेजी जाती रही। करीब डेढ़ साल तक बाजार में डीएपी बिकने के कारण स्टॉक खत्म होता चला गया। जबकि इफको से लगातार रैक भेजी जा रही थी। इस खेल में भंडार नायक संतोष कुमार के साथ ही उसके परिवार, रिश्तेदारों संग विभागीय अधिकारियों व कुछ कर्मचारियों की भी मिलीभगत सामने आ रही है। हालांकि अभी पुलिस अधिकारी मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं।