कुंडा इलाके के शेखपुर आशिक गांव में ताजिया के रास्ते में पड़ने वाले हनुमान मंदिर में मोहर्रम के दिन भंडारा और पूजापाठ पर रोक लगाने से खफा पूर्व कैबिनेट मंत्री रघुराज प्रताप सिंह के पिता उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश सरकार पर अपनी भड़ास निकाली।
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पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को कुचलने का काम किया जा रहा है। यह मौलिक अधिकारों का हनन है। ताजिया रास्ते से गुजरने को लेकर मंदिर में पूजा नहीं करने दी जा रही है। दोनों धर्मों को समान भाव से देखा जाना चाहिए, लेकिन इस तरह के प्रतिबंध लगाकर शासन क्या साबित करना चाहता है।
पूजापाठ के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होनी चाहिए। इसके बाद भी आवेदन किया गया, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। भंडारा न सही लोगों को पूजापाठ के लिए तो मना नहीं किया जा सकता। सरकार पूजापाठ बंद करा रही है। उन्होंने बताया कि किले में आकर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने उनसे मीठी-मीठी बातें कीं। बाद में मौके पर ले जाकर दबाव बनाने लगे। अगर उन्हें इसकी जानकारी पहले होती तो वह उनसे मिलते ही नहीं। उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान किया जाता है।
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विवादित 15 केसरिया झंडों की सुरक्षा के लिए कराई बैरिकेडिंग
विवादित 15 केसरिया झंडों को बैरिकेडिंग कर किया गया सुरक्षित।
- फोटो : pratapgarh
विवादित 15 केसरिया झंडों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने बैरीकेडिंग कराई। इसके साथ ही मंदिर के पास भी बैरीकेडिंग कर दी गई थी। इन 15 झंडों को उखाडने के लिए प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया था। बाद में पुलिस सुरक्षा करती रही।
कुंडा के शेखपुर में सडक़ के दक्षिण तरफ 15 झंडे लगे थे। पुलिस का कहना था कि यह 15 झंडे रजिस्टर के रिकार्ड में नहीं हैं। उधर ताजियादारों ने भी इस झंडे पर विरोध जताया था। इसके चलते इन झंडों को उखाडने के लिए उपजिलाधिकारी मोहनलाल गुप्ता ने किले के गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया।
इसके बाद भी इसका पालन न होने पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी पहुंचे थे। बाद में बात नहीं बनने पर उसकी सुरक्षा कर दी गई। मंगलवार को पुलिस ने झंडे के पास बैरीकेडिंग करके उसे सुरक्षित कर दिया। इसके साथ ही वहां सिपाहियों की तैनाती कर दी। इसके अलावा मंदिर के पास भी पुलिस ने बैरीकेडिंग कर रखी थी।
ताजिया उठने तक सहमा रहा प्रशासन, मुस्तैद रही पुलिस
कुंडा के शेखपुर में मंदिर के सामने से निकलता ताजिया।
- फोटो : pratapgarh
शेखपुर हनुमान मंदिर पर होने वाले भंडारे और मोहर्रम पर निकलने वाले ताजिये को लेकर सुबह से शाम तक भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रही। भंडारे की अनुमति नहीं देने और उदय प्रताप सिंह समेत 10 लोगों को नजरबंद करने के बाद भी किले, मंदिर सहित कई जगह पर भारी पुलिस फोर्स लगी रही। बवाल की आशंका में इलाहाबाद, कौशाम्बी और लखनऊ से भी फोर्स बुला ली गई थी। कमान सीओ रैंक के अधिकारियों के हाथ में रही। बाजार की दुकानों और ढाबे को भी बंद रखने का निर्देश था। पूरे दिन अधिकारी भ्रमण करते रहे। ताजिया उठने तक पूरा प्रशासन सहमा रहा।
हनुमान मंदिर पर भंडारे को लेकर ही वर्ष 2015 में ताजिया नहीं उठाया गया था। इसको लेकर प्रशासन काफी गंभीर था। यही कारण रहा कि पुलसि प्रशासन ने पहले से ही रणनीति तैयार कर रखी थी। हालांकि इस बार बीते वर्ष की अपेक्षा पुलिस कम रही। बड़े अधिकारियों ने भी ज्यादा समय नहीं दिया। इसके अलावा एडिशनल एसपी सहित सीओ स्तर के अधिकारी मौके पर डटे रहे।
किले के गेट पर एडिशनल एसपी सहित एक स्टेटिक मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस फोर्स तैनात रही तो मंदिर पर भी सीबीसीआईडी के सीओ रैंक के अफसर सहित भारी संख्या में फोर्स मौजूद रही। इसके अलावा कुंडा सीओ, एसडीएम, कोतवाल लगातार भ्रमण करते रहे।
सीओ कुंडा ने भारी पुलिस फोर्स के साथ दिन में शेखपुर में फ्लैग मार्च किया। इसके बाद कुंडा में भी फ्लैगमार्च कराते हुए लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से त्यौहार मनाने का संदेश ंदिया गया। इसके अलावा शेखपुर चौराहा, भदरी चौराहा, बाबूगंज, मझिलगांव, तिरंगा तिराहा सहित 55 प्वाइंट पर पुलिस की तैनाती रही। इसके अलावा उदय प्रताप सिंह के आने वाले हर संभावित रास्ते पर पुलिस को तैनात किया गया था। दुकानों और ढाबों के बंद रहने के भी निर्देश दिए गए थे।