जिला कारागार में अभी भी अधिकांश बंदी भूख हड़ताल पर हैं। रात में जेल प्रशासन के रवैये से आक्रोशित बंदियों ने प्रभारी जेल अधीक्षक और पुलिस अफसरों पर टमाटर फेंके। इससे गुस्साई पुलिस व बंदी रक्षकों ने मिलकर बंदियों को पीटा। पिटाई से दस बंदियों को चोटें आईं। उन्हें जेल के अस्पताल में रखा गया है। उधर, जेल प्रशासन पिटाई व किसी भी बंदी के घायल होने की जानकारी से इनकार कर रहा है।
जेल प्रशासन के रवैये से नाराज बंदी सोमवार से भूख हड़ताल पर हैं। भले ही जेल प्रशासन व जिला प्रशासन बंदियों के खाना खाने का दावा कर रहे हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। अभी भी अधिकांश बंदी भूख हड़ताल पर हैं। सोमवार की रात आंदोलित बंदियों को काबू में करने के दौरान बंदी रक्षकों ने हाथ चला दिया। जिससे बंदी गुस्सा गए। बंदियों ने प्रभारी जेल अधीक्षक आरपी चौधरी व पुलिस अफसरों पर भी टमाटर व प्याज फेंकना शुरू कर दिया।
जिससे पुलिस व बंदी रक्षकों को गुस्सा आ गया। फिर एक तरफ से बंदियों पर कहर टूट पड़ा। जो सामने मिला, उस पर डंडा चलता रहा। बंदी भागकर बैरकों में छिप गए, लेकिन वहां भी घुसकर जेल के बंदी रक्षक व पुलिसकर्मियों ने बंदियों को जमकर पीटा। पिटाई से चांद पुत्र खूंटी समेत 10 बंदी घायल हो गए। जिन्हें उपचार के लिए जेल अस्पताल भेजा गया।
हालांकि प्रभारी जेल अधीक्षक आरपी चौधरी ने बल प्रयोग करने व बंदियों को उपचार के लिए अस्पताल में रखने की बात से इनकार करते हुए कहा कि सभी बंदी खाना खा रहे हैं। बंदी सुभाष यादव के पास से मोबाइल मिला था। जिसे कब्जे में लेने के बाद बंदियों ने बवाल व भूख हड़ताल शुरू की थी।
कैंटीन को लेकर तो नहीं छिड़ी जंग
जिला कारागार में कैंटीन को लेकर तो जंग नहीं छिड़ी है। जेल सूत्रों की मानें तो अभी तक जेल की कैंटीन नौ नंबर बैरक के बंदी संचालित करते थे। मार्च माह में कैंटीन दो नंबर बैरक के बंदियों के पास आ गई है। जिसे लेकर जेल के भीतर जंग छिड़ी हुई है।
थानेदार ने लगाया अपनी सुरक्षा में सिपाही
सोमवार की देर रात जेल कारागार में बंदियों को शांत कराने के लिए कई थानों की फोर्स पहुंची। एडीएम शत्रुघ्न वैश्य और अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अवनीश मिश्रा भी जेल पहुंचे थे। आक्रोशित बंदियों के बेकाबू होने की आशंका से पुलिस भी सहमी रही। सूत्रों की मानें तो बैरकों की ओर जाने वाले जिले के एक थानेदार ने खुद अपनी सुरक्षा कराने के लिए सिपाहियों को आगे पीछे लगा लिया। उन्हें आशंका थी कि जेल में निरुद्ध बहुत से बंदियों को उन्होंने जेल भेजा है। हो सकता है मौका पाकर उन पर कोई हमला बोल दे।
रुपये मिलते ही बंदीरक्षक मुहैया कराते हैं सुविधा
जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों का कहना है कि पेशी से लेकर मुलाकात करने वाले परिवार के लोगों की बराबर तलाशी होती है। सीसीटीवी फुटेज की निगरानी में उनके परिवार के लोग मिलने जाते हैं। हर कदम पर बंदियों के साथ ही मुलाकात करने के लिए जाने वाले परिजनों का शोषण होता है। आरोप लगाया कि रुपये लेकर बंदीरक्षक ही बंदियों को सारी सुविधाएं मुहैया कराते हैं। हर काम के लिए रेट बंधा हुआ है।
जेल प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
जिला कारागार से न्यायालय पेशी पर लाए गए बंदियों ने जेल प्रशासन के खिलाफ हंगामा काटते हुए प्रिजन वैन से उतरने से इनकार कर दिया। प्रभारी जेल अधीक्षक समेत बंदी रक्षकों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से सुनवाई की गुहार लगाई। आधे घंटे बाद पहुंचे पुलिस बल ने सभी को कचहरी लॉकअप में भेजा। इस दौरान कचहरी परिसर में गहमागहमी का माहौल व्याप्त रहा।
जिला कारागार से मंगलवार को न्यायालय पेशी पर 49 बंदी लाए गए। कचहरी लाकअप के पास प्रिजन वैन पहुंची। पुलिसकर्मी बंदियों को नीचे उतारने लगे, लेकिन बंदी उतरने से मना करते हुए जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बंदियों का आरोप था कि जेल में बंदीरक्षक अनायास मारते पीटते हैं। सोमवार की रात पुलिस के साथ बंदी रक्षकों ने उन लोगों की जमकर पिटाई की। इसके पहले भी उन लोगों पर जुल्म ढाया जाता रहा।
हर काम के लिए रुपये देना पड़ते हैं। कैंटीन में महंगे दाम पर खाद्य पदार्थ व सामान दिए जाते हैं। अपने चहेतों को कैंटीन संचालित करने के लिए प्रभारी जेल अधीक्षक ने दे रखा है। पेशी पर आने से पहले धमकाया था कि यदि किसी से शिकायत किए तो ठीक नहीं होगा। अधिक विरोध करने पर दूसरी जेल ट्रांसफर करने की धमकी दी जाती है। कैंटीन में एक रुपये की माचिस का 5 रुपये लिया जाता है। रुपये खर्च करने वाले को हर सुविधा मुहैया कराई जाती है। जो लोग रुपये नहीं दे पाते। उन लोगों से काम कराया जाता है। बंदीरक्षक खुद रुपये लेकर बंदियों को सुविधा मुहैया कराते हैं।
बंदियों ने सीएम को भेजे पत्र में सुनाया दुखड़ा
जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों ने सीएम को शिकायती पत्र भेजकर अपना दुखड़ा सुनाया है। पत्र में बंदियों ने लिखा है कि जेल में उन लोगों का आथक शोषण व उत्पीडन हो रहा है। ऐसे में अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराया जाए। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अन्यथा प्रभावी बंदी मौज करेंगे और आथक रूप से कमजोर बंदियों को यातनाएं मिलती रहेंगी।