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प्रतापगढ़: नहीं मिली एंबुलेंस, बीमार महिला को ठेले से लेकर चल पड़े परिजन

Tue, 16 Apr 2019 11:53 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
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जिला अस्पताल से मरीज को रिक्शा ट्राली पर लेकर घर जाते तीमारदार। - फोटो : प्रतापगढ़
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बीमार महिला को एंबुलेंस नहीं मिली। इस पर परिजन उसे ठेले से लेकर घर के लिए चल पड़े। डाक्टरों ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए प्रयागराज रेफर कर दिया था। जब परिवार के लोग वृद्घ महिला को उपचार के लिए ले जाने में असमर्थ हो गए तो स्वास्थ्यकर्मचारियों ने उसे वार्ड से बाहर कर दिया। 

लालगंज कोतवाली के उमापुर निवासी शांती (65) पत्नी विजयनाथ सप्ताह भर से बीमार हैं। उसे सांस लेने में दिक्कत है। तीन दिन पहले परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताकर उसे प्रयागराज रेफर कर दिया। परिजन प्रयागराज ले जाकर इलाज कराने में असमर्थता जताए तो चिकित्सक नाराज हो गए। विजयनाथ का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उसकी पत्नी को वार्ड से बाहर कर दिया। वह एंबुलेंस के लिए फोन लगाता रह गया। मगर एंबुलेंस के टोल फ्री नंबर पर फोन नहीं लगा।
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आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह किसी भी प्राइवेट वाहन को बुला नहीं सका। मजबूरी में ठेला मंगवाकर शांती को उस पर लेटाकर घर के लिए निकल पड़ा। अंबेडकर चौराहे पर शांती के पति विजयनाथ से बात की गई तो उसने बताया कि इलाज के नाम पर सरकारी अस्पताल में खानापूर्ति हो रही है। चिकित्सक बाहर का इंजेक्शन और दवा लिख रहे थे। जिसे न लाने पर फटकार लगाते थे। विरोध करने पर उसकी पत्नी को रेफर करने के साथ ही उसे वार्ड से बाहर कर दिया गया।

आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण वह प्रयागराज या फिर किसी प्राइवेट अस्पताल में पत्नी को नहीं ले जा सके। इस मामले में सीएमएस योगेंद्र यति ने कहा कि हालत गंभीर होने और इलाज की संपूर्ण व्यवस्था न होने के कारण मरीज को रेफर किया गया होगा। बहुत से मरीज हैं जिन्हें चिकित्सक रेफर कर देते हैं, फिर भी वे भर्ती रहकर उपचार कराते हैं। किसी को वार्ड से निकाला नहीं जाता है। यह आरोप पूरी तरह से गलत है। रही बात एंबुलेंस की तो इसके बारे में हमे जानकारी नहीं है। 
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बीमार मरीजों को घर से अस्पताल लाने और रेफर होने पर प्रयागराज पहुंचाने के लिए एंबुलेंस लगी है। मरीजों को सुविधा भी मिल रही है। शांती के परिजनों ने टोल फ्री नंबर 108 पर फोन ही नहीं मिलाए। वे एंबुलेंस की मांग तक नहीं किये। अपने मन से ठेले पर लादकर घर ले जा रहे थे। 
सत्येन्द्रू, प्रोग्राम मैनेजर एंबुलेंस। 
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