सदर, पट्टी और रानीगंज तहसील में चुनाव होने के बाद प्रधान पद के प्रत्याशी दलित और गरीब मतदाताओं पर अपनी खीझ निकाल रहे हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में मारपीट की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई गांवों में दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए हैं। इससे किसी भी दिन हिंसक वारदात हो सकती है।
जिले के पहले और दूसरे चरण में सदर, पट्टी और रानीगंज तहसीलों में चुनाव हो चुका है। इन तहसीलों के प्रत्याशियों के मतों की गणना 13 दिसंबर को होगी। मगर, चुनाव के दिन का माहौल भांपकर प्रत्याशियों ने यह आंकलन कर लिया है कि उन्हें जीत मिलनी है या नहीं। स्वाभाविक है कि अगर एक ग्राम पंचायत में 13 प्रत्याशी खडे़ हैं, तो उसमें जीत एक ही प्रत्याशी की होनी है। इससे 12 प्रत्याशी को हार का सामना करना होगा। इससे नाराज प्रत्याशी अब अपनी खीझ मतदाताओं पर निकाल रहे हैं। गांव के गरीब और दलितों को मारपीट कर डर पैदा किया जा रहा है और आने वाले दिनों में सबक सिखाने की धमकी दी जा रही है।
जिले के नरिया, पुरैली, खजुरनी, गुडरू, करनपुर, छतरपुर, कटकामानापुर में मंगलवार को हुए चुनाव के बाद से ही मारपीट की घटनाएं बढ़ गई हैं। नरिया गांव में एक प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं करने पर लगातार मारने-पीटने की धमकी दी जा रही है। रसूलपुर गुलरहा में प्रधान प्रत्याशी ने चुनाव खत्म होते ही एक मतदाता को वोट नहीं देने पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। यह तो महज उदाहरण है। ग्रामीण इलाकों में इन दिनों जो मारपीट की घटनाएं हो रही हैं, उनमें से अधिकांश मतदान को लेकर उपजी गुटबाजी के कारण ही हो रही हैं। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दिनेश कुमार सिंह ने स्वीकार किया कि प्रधानी की चुनाव ने गांव की शांति में खलल पैदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिले की पुलिस को सक्रिय करते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।