विवादित कब्रिस्तान में किशोरी के शव को दफनाने को लेकर एक ही समुदाय के दो पक्ष आमने-सामने हो गए। प्रशासन के पहुंचने पर एक पक्ष भिड़ने पर उतारू हो गया। तनाव को देखते हुए कई थानों की फोर्स बुलानी पड़ गई। शाम तक मान मनौवल के बाद भी जब बात नहीं बनी तो शव को दूसरी जगह दफन कराया गया। प्रशासन ने पैमाइश होने तक किसी को भी पक्ष को कब्रिस्तान में शव दफनाने पर रोक लगा दी है।
लालगंज कोतवाली के सलेम भदारी गांव में मंगलवार की रात मो. नासिर की 15 वर्षीय पुत्री नजरीन बानो का बीमारी के चलते इंतकाल हो गया। बुधवार की सुबह गांव के विवादित कब्रिस्तान में शव दफन करने परिजन व रिश्तेदार पहुंच गए। इस बीच उन्हीं के समुदाय से दूसरे पक्ष के लोग यहां पहुंचे और किशोरी के शव को दफन करने से रोक दिया। इससे दोनों पक्षों में तनाव बढ़ गया। जानकारी मिलने पर कोतवाली पुलिस के साथ नायब तहसीलदार सदानंद मौके पर पहुंचे और शव को कब्रिस्तान में दफन करने के लिए दोनों पक्षों से बात करने लगे।
इस बीच दोनों पक्षों से सैकड़ों लोग जुट गए और मारपीट पर उतारू हो गए। उन्हें आमने-सामने देख एनटी ने सूचना देकर एसडीएम वाईबी सिंह, सांगीपुर एसओ गया प्रसाद शुक्ल को बुला लिया। एसडीएम की बात पर भी एक पक्ष शव को कब्रिस्तान में दफन करने देने पर राजी नहीं हुआ। बल्कि एसडीएम समेत अधिकारियों से कहासुनी क रते हुए भिड़ने पर उतर आए। दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की जानकारी पर सीओ बीआर प्रेमी, संग्रमागढ़ एसओ सभाजीत मिश्र, लालगंज प्रभारी कोतवाल विहागड़ सिंह यादव भारी भरकम फोर्स के साथ-साथ राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी के मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ल भी पहुंच गए।
इनके समझाने पर भी एक पक्ष के लोग शव को दफनाने देने पर राजी नहीं हुए। दोपहर तीन बजे तक कोई रास्ता नहीं निकलता देख किशारी के परिजनों को समझा बुझाकर प्रशासन ने दूसरी जगह शव को दफन कराया। इसके बाद जाकर कुछ तनाव कम हो सका। बाद में एसडीएम वाईबी सिंह ने कब्रिस्तान की जमीन की पैमाइश होने तक किसी भी पक्ष के शव दफन करने पर रोक लगा दी। उन्हाेंने चुनाव के बाद कब्रिस्तान के विवाद की जांच कराए जाने को कहा है।