अरहर की दाल जमाखोरों के चंगुल में फंसकर रह गई है। अधिक दाम पर बेचने की तैयारी करने वाले थोक विक्रेता फुटकर विक्रेताओं से दाल नहीं उपलब्ध होने की बात कह रहे हैं। जबकि वास्तविकता तो यह है कि दाल से भरा ट्रक रात में पहुंचने के बाद सीधे गोदाम में स्टाक जमा किया जा रहा है।
अरहर की दाल का संकट गहरा गया है। चुनाव में अफसरों के व्यस्त होने के कारण जमाखोर इसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं। अभी तक दो सौ रुपये में बिकने वाली दाल मंगलवार को 210 रुपये प्रति किग्रा बिकी। अरहर की दाल के दामों में हो रहे इजाफे का कारण मांग के अनुरूप उपलब्धता नहीं होना बताया जा रहा है। दिन-प्रतिदिन दाम में हो रही बढ़ोतरी से आम आदमी के थाली से दाल गायब होती जा रही है। वास्तव में जिले में थोक विक्रेताओं के दाल डंप करने के कारण दाम में इजाफा हो रहा है।
बाहर से आने वाली दाल को थोक व्यापारी डंप करने में जुटे हुए हैं। रात में ट्रकों में भरकर आने वाली बोरियों को गोदाम में जमा किया जा रहा है। जबकि फुटकर दुकानदारों से दाल की आवक कम होने का बहाना बनाकर उन्हें टाला जा रहा है। बताते हैं कि जो फुुटकर दुकानदार मुंहमांगी रकम दे रहे हैं उन्हें से चुपके दाल की बोरियां दी जा रही हैं। बाजार की कीमत के अनुसार रकम देने वालों को बहाना बताया जा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी डीपी सिंह ने जल्द ही जमाखोरों के खिलाफ अभियान चलाने को कहा है। उन्होंने बताया कि अगर किसी दुकानदार के पास मानक से अधिक दाल मिली तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।