‘मूंदहूं आंख कतहुं कछु नाही’ बुजुर्गों की ये कहावत जिले के अधिकारियों खासकर विद्युत अफसरों पर सटीक बैठ रही है। दम तोड़ चुकी बिजली की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर विभाग तो लापरवाही बरत ही रहा है शीर्ष अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे। उपकेंद्र स्तर पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही कोढ़ में खाज का काम कर रही है। हालात ये हैं कि शहरी उपभोक्ताओं को छह घंटे भी ठीक से आपूर्ति नहीं मिल रही। गांव की स्थिति तो और भी बदतर है।
जिसकी वजह से इस उमस भरी गर्मी में लोग काफी परेशान हैं। बिजली के अभाव में लोगों के घर में लगे इनवर्टर व कूलर और यहां तक कि पंखा भी शोपीस बन चुका है। शहर में पंद्रह घंटे आपूर्ति का रोस्टर है। विभागीय लोगों इस रोस्टर को धता बताते हुए अंधाधुंध कटौती कर रहे हैं। शहर के मीराभवन निवासी बृजेश कुमार, कल्लू मोदनवाल, स्टेशन के बबलू चौरसिया आदि कहते हैं कि शहर में छह घंटे की भी आपूर्ति नहीं मिल रही। कभी इमरजेंसी तो किसी समय फाल्ट बनाने के नाम पर जबरदस्त कटौती की जा रही है। वे यह भी बताते हैं कि रात हर 10 मिनट आधे घंटे पर आपूर्ति का ट्रिप होना आम बात है।
कटौती की जानकारी के लिए फोन लगाने पर पता चलता है कि अधिकारियों ने मोबाइल नाट रिचेबल में लगा रखा है। घंटों फोन लगाने पर भी रात में अक्सर उनका मोबाइल पहुंच क्षेत्र से दूर ही बताता है। कर्मचारी तो मोबाइल उठाते ही नहीं। कुछ ऐसे भी हैं जो बंद किए रहते हैं। गांव की स्थिति और बदतर बताई जाती है। लोग कहते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में दस घंटे आपूर्ति का रोस्टर है मगर तीन घंटे भी बिजली नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोग जिले के अधिकारियों को कोस रहे हैं। हमेशा की तरह एक्सईएन विद्युत शनिवार को भी फोन उठाना गवारा नहीं समझे।
शहर की आर्थिक व व्यापारिक राजधानी कहलाने वाले चिलबिला में शुक्रवार की दोपहर 12 बजे से बिजली नहीं है। स्थानीय निवासी रोशनलाल ऊमरवैश्य, गुल्लइया महराज आदि ने बताया कि समस्या की बाबत उपकेंद्र को खबर दी गई। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। बात एक्सईएन तक पहुंचाई गई फिर भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। ऐसी दशा में उमस भरी गर्मी से लोग परेशान रहे। डिस्चार्ज मोबाइल तक चार्ज करने के लिए लोग इधर उधर भटकते रहे।