पट्टी इलाके के धुंई और गोविंदपुर गांव के ग्रामीणों के बीच हुए बवाल के मामले में पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देश के बाद पुलिस ने गोविंदपुर की पीड़ित महिलाओं की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में छेड़छाड़, पॉस्को एक्ट और पशु क्रूरता अधिनियम की धाराएं बढ़ा दी हैं।
दो दिन पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डीएम और एसपी के साथ हुई बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य कौशलेंद्र ने पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष जताया था। इस दौरान उन्होंने पीड़ित महिलाओं के साथ भी बातचीत की थी।
पट्टी थाना क्षेत्र के धुंई निवासी रामआसरे तिवारी व आसपुर देवसरा इलाके के गोविंदपुर निवासी नन्हे वर्मा के बीच 21 मई की शाम खेत में मवेशी जाने को लेकर हुए विवाद के बाद 22 मई को बवाल हो गया था।
गोविंदपुर के बद्री वर्मा की पशुशाला में लगी आग के कारण तीन मवेशी झुलस गए थे। ग्रामीणों के हमले में पांच पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे। इस मामले में गोविंदपुर की आठ महिलाओं ने पिछड़ा वर्ग आयोग को प्रार्थना पत्र भेजकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया था।
एक जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान आयोग के सदस्य कौशलेंद्र सिंह पटेल की फटकार पर पुलिस ने नन्हे वर्मा की पत्नी सीता देवी की तहरीर पर धुंई गांव के प्रधान पुत्र अनिल तिवारी, रामआसरे तिवारी समेत 14 नामजद व 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
16 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य कौशलेंद्र सिंह पटेल ने दोबारा डीएम-एसपी से मामले की जानकारी ली। इस दौरान गोविंदपुर की पीड़ित आठ महिलाओं को भी बुलाया गया था।
सुनवाई के दौरान महिलाओं ने बताया कि पुलिस ने छेड़खानी और अन्य धाराओं मे रिपोर्ट नहीं दर्ज की है। इस पर पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य ने नाराजगी जताई थी।
उन्होंने डीएम और एसपी को तीन दिन के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। बुधवार शाम पुलिस ने सीता देवी की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में सात अन्य महिलाओं के प्रार्थना पत्रों को शामिल करते हुए छेड़छाड़, पास्को एक्ट व पशु क्रूरता अधिनियम की धाराएं बढ़ा दीं।