स्वास्थ्य विभाग के अफसर शासन के फरमान पर भी पानी फेरने से बाज नहीं आ रहे हैं। शासन के आदेश के बाद भी गर्भवती महिलाओं की मुफ्त अल्ट्रासाउंड जांच बंद कर दी गई है। इससे गर्भवती महिलाएं परेशान हो रही हैं। पीएम सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत महिलाओं की मुफ्त में अल्ट्रासाउंड जांच नहीं कराई जा रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
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शासन ने प्रति माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया था। गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल लाकर मुफ्त में जांच कराने को कहा था। जहां पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है वहां पीपीमोड के तहत व्यवस्था कराने को कहा था।
जिले में अब तक महिला अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं की जांच मुफ्त में होती थी। कोरोना महामारी के दौर में शासन के आदेश को स्वास्थ्य विभाग भूल गया। अब महिलाओं की मुफ्त में अल्ट्रासाउंड जांच नहीं करवाई जा रही है। इससे गर्भवती महिलाएं परेशान हैं। उन्हें बाहर भेजकर जांच करवाई जा रही है।
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सीएचसी में नहीं है जांच की व्यवस्था
जिलेभर में वैसे तो 17 सीएचसी 5 एडिशनल पीएचसी का संचालन हो रहा है। मगर इनमें से कहीं भी गर्भवती महिलाओं की मुफ्त अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे गर्भवती महिलाओं को परेशान होना पड़ता है। सीएचसी-पीएचसी के आसपास कई अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन हो रहा है। चिकित्सक ऐसे ही सेंटरों पर भेजकर जांच कराते हैं जिनके पास किसी प्रकार का कागजात नहीं होता है। सीएमओ भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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कोरोना के चलते बढ़ गया जांच का दाम
महामारी कोरोना वायरस के चलते अल्ट्रासाउंड जांच के दाम बढ़ गए हैं। अब तक चार सौ रुपये में अल्ट्रासाउंड होता था। कोरोना के बाद अब प्राइवेट संचालक सात सौ रुपये तक वसूलने लगे हैं।
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वहीं, इस संबंध में सीएमओ डॉ. अरविंद कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अभी तो मैं खुद ही होम क्वारंटीन हूं। यहां से छुटकारा मिले तो बहुत कुछ बदलाव करना है। अवैध अल्ट्रासाउंड संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सीएचसी-पीएचसी में जहां अल्ट्रासाउंड मशीन है, वहां के एक-एक चिकित्सक को ट्रेनिंग दिलाकर जांच की व्यवस्था शुरू कराई जाएगी।