पत्नी और बेटी के इलाज को लेकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। बगल से खेलकर बच्चे लौटे तो दरवाजा बंद देखकर आसपास के लोगों को बुलाया। लोगों ने अंदर झांककर देखा तो वह फांसी के फंदे से लटक रहा था। सूचना पर परिजनों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के नेवढ़िया सरैया गांव निवासी योगेंद्र नारायण पांडेय (40) पुत्र स्व. राजनारायण पांडेय अहमदाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। बीते 7 वर्षों से उसकी पत्नी संगीता बीमार है। पहले उसने उसका इलाज प्रयागराज में निजी चिकित्सकों से कराया। बाद में आर्थिक स्थिति खराब हुई तो अपने आसपास के चिकित्सकों तथा सीएचसी संग्रामगढ़ में ही इलाज कराने लगा।
इधर बीच पत्नी का इलाज वह मनगढ़ में करवा रहा था। उसकी पुत्री आयुषी (9) को भी पैर में दिक्कत थी। उसका भी इलाज बीते दो-तीन सालों से डेरवा के नर्सिंगहोम से चल रहा था। मार्च में योगेंद्र घर आया।
इसके बाद लॉकडाउन होने के चलते वह काम पर नहीं जा सका। इससे उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही थी। दूसरी तरफ पत्नी और बेटी के इलाज में भी पैसा लग रहा था। इसके चलते वह परेशान रहता था।
पत्नी के नाम पात्र गृहस्थी का राशनकार्ड बना था, लेकिन दवा में होने वाले खर्च से वह चिड़चिड़ा हो गया था। सोमवार की सुबह उसकी पत्नी जानवरों को लेकर चराने चली गई। बच्चे बगल में खेलने चले गए। इस दौरान योगेंद्र ने घर में साड़ी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली।
बच्चे लौटे तो दरवाजा बंद होने के चलते आसपास के लोगों को बुलाया। लोगों ने अंदर झांककर देखा तो वह फंदे से लटक रहा था। इसकी जानकारी होने पर परिजनों में चीखपुकार मच गई। सूचना पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पैसे अभाव में चिड़चिड़ा होकर पत्नी का किया था गला दबाने का प्रयास
पैसे के अभाव में युवक चिड़चिड़ा हो गया था। पत्नी की तो दवा चल ही रही थी। उधर, बेटी की दवा भी उसे भारी पडने लगी थी। इसके चलते एक दिन दवा खिलाते समय गुस्से में उसने पत्नी का गला दबाने का प्रयास किया था। हालांकि शोर शराबे पर आसपास के लोगेां ने उसे डाटा तो वह शांत हुआ।