मानिकपुर के शहाबाद घाट पर गंगा में गिरता गंदे नाले का पानी।
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मुख्यमंत्री की गंगा यात्रा के दौरान भी सदानीरा में गंदगी गिराई जा रही है। गंगा में गिरने वाले गंदे नालों और नालियों को रोकने की कोई व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है। इसके अलावा गांव की नालियों से निकलकर गंगा में गिरने वाली गंदगी भी कार्यक्रमस्थल को छोडक़र कहीं नहीं रोकी गई है। गंगा की निर्मल धारा में ऐसे समय में गंदगी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने गंगा की सफाई और उसके महत्व को लेकर गंगा यात्रा की शुरुआत की है। सीएम के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिले में गंगा के किनारे पडने वाले कुंडा और कालाकांकर ब्लाक के 18 गांवों को डीएम मार्कण्डेय की अगुवाई में अफसरों की टीम चमकाने में जुटी है। इन गांवों में गंगा आरती, बच्चों की प्रभातफेरी के साथ ही घाटों पर सफाई के स्लोगन लिखवाए जा रहे हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि कालाकांकर में मुख्यमंत्री की जनसभा होगी। इसमें मुख्यमंत्री के साथ ही डिप्टी सीएम और मंत्री भी शामिल होंगे।
बावजूद इसके अधिकारी मुख्यमंत्री की इस यात्रा के महत्व को समझ नहीं पाए हैं। गंगा के किनारे के 18 गांवों में विकास कार्यों के साथ ही साफ-सफाई का कार्य तो किया गया, लेकिन गंगा की धारा को निर्मल बनाने के लिए कुछ किया नहीं गया। कालाकांकर घाट पर ही गांव का पानी नाली के माध्यम से गंगा में गिरता है। घाट पर ही कार्यक्रम होने के चलते नाली का बहाव दूसरी तरफ कर दिया गया है। इसका कोई स्थायी हल नहीं निकाला गया है। कार्यक्रम होने तक यह जरूरी दूसरी तरफ से गंगा में गिरेगा, लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद गांव की गंदगी फिर से गंगा में गिरने लगेगी।
घाट के माध्यम से गंगा में पहुंचने वाले पानी का रास्ता अभी भी साफ दिख रहा हव्ै। मानिकपुर का शहाबाद घाट स्नान घाट के लिए अपना महत्व रखता है। गंगा स्नान के लिए यहां स्नान पर्वों पर भारी भीड़ होती है। बावजूद इसके सैकड़ों गांवों से होता हुआ एक नाला घाट के पास ही गंगा में मिलता है। इसमें से बहती हुई गंदगी गंगा के पानी को दूषित करती है।
शहाबाद का घाट तो शासन ने नए मॉडल में बनवा दिया, लेकिन इस नाले के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की। इसके चलते सैकड़ों गांवों की गंदगी गंगा में गिरती रहती है। अभी भी लगातार नाले का पानी गंगा में गिर रहा है। इसके अलावा मानिकपुर के नगर के मुहल्लों का पानी भी इसमें गिरता रहता है। इसके अलावा गोतनी सहित अन्य गांवों में भी लोगों के घरों के नाबदान का पानी गंगा में मिलता रहता है। इस पर न तो शासन ने कोई ध्यान दिया और न ही कार्यक्रम के मद्देनजर अधिकारियों ने ही कोई व्यवस्था की।