बरसात शुरू होने से पहले ही जिले में डेंगू और चिकनगुनिया और मस्तिष्क ज्वर का प्रकोप शुरू हो गया है। छह माह के भीतर जिले में संक्रामक बुखार की चपेट में आने से सात लोगों की हालत बिगड़ी। इनमे से तीन की जान चली गई।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि आमतौर पर बारिश के दौरान ही डेंगू, चिकनगुनिया कि साथ मस्तिष्क ज्वर के मरीज सामने आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो बीते छह माह के भीतर सात मरीज इन बीमारियों से पीड़ित पाए गए हैं।
इलाज के दौरान तीन मरीजों ने दम तोड़ दिया। इनमें लालगंज के हड़ौर निवासी रामा त्रिपाठी (55) पत्नी केशरीनंदन त्रिपाठी, कोहड़ौर के वारीकला निवासी जगरनाथ सरोज (67) व सांगीपुर आहरबिहर निवासी कमलापति (80) को मस्तिष्क ज्वर हो गया था। जिसके चलते इन तीनों लोगों की मौत हो गई।
वहीं सांगीपुर के पूरेराजराकी निवासी विधि सिंह (17) पुत्री सुनील, पट्टी कोतवाली के सारडीह निवासी पप्पू मौर्य (35) , वहीं कालाकांकर के वाजिदपुर निवासी आरआर त्रिपाठी (67) को भी मस्तिष्क ज्वर हुआ था। सांगीपुर के कपूरपुर निवासी रामसुमेर (56) पुत्र रामधनी डेंगू की चपेट में आ गए।
डेंगू के जांच और इलाज के लिए जिले में नहीं है कोई व्यवस्था
बरसात करीब आ गई है। इसके बावजूद जिले में न तो जांच की व्यवस्था की गई है और न ही मरीजों को भर्ती कर इलाज करने की। जिला अस्पताल में हर ओर गंदगी का अंबार लगा है। अस्पताल के पीछे ही जलजमाव है। अस्पताल के वार्डों में लगीं खिड़कियों की जाली टूट चुका है। स्वास्थ्य विभाग का ध्यान इस ओर नहीं पड़ रहा है।
जनवरी से लेकर अब तक मस्तिष्क ज्वर की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हुई है। जिला मलेरिया अधिकारी को रोस्टर तैयार कर दवा का छिड़काव करने के लिए आदेश दिया गया है।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।