एएनएम की तैनाती न होने से जिले के 155 एएनएम सेंटरों पर ताला लटक रहा है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को जहां पंजीयन कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है, वहीं प्रसव पीड़ा के दौरान दूर के सीएचसी-पीएचसी का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं और प्रसव पीड़िताओं की देखरेख के लिए जिले में 426 एएनएम सेंटर बनाए गए हैं। हर सेंटर पर एक-एक एएनएम की तैनाती के लिए पद भी स्वीकृत है। उनके रहने के लिए अलग से आवास, दवा स्टोर, दो बेड का लेबर रूम भी बनाया गया है। इन सुविधाओं का लाभ गर्भवती महिलाओं, प्रसव पीड़िताओं और नवजातों को नहीं मिल पा रहा है।
सेंटर पर न तो टीकाकरण होता है और न ही प्रसव। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 426 एएनएम के स्थान पर महज 271 की तैनाती शासन से की गई है। 155 सेंटरों पर ताला लटक रहा है। इससे नवदंपति और गर्भवती महिलाओं की न तो जांच हो पाती है और न ही उनका इलाज होता है। प्रसव पीड़ा के दौरान गर्भवती महिलाओं को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। मगर जिम्मेदार इससे अनजान बने हैं। इन सेंटरों पर एएनएम की तैनाती तक नहीं कर रहे हैं।
आशा बहू के भरोसे ज्यादातर सेंटर
155 सेंटरों पर एएनएम की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में सेंटर की चाभी आशाओं के पास रहती है। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर यदि महिलाएं सेंटर पर आती हैं तो आशा बहू नार्मल प्रसव करवाने का प्रयास करने लगती है। जिसके चलते जच्चा- बच्चा की जान को खतरा बना रहता है। परेशान होकर लोग सीएचसी और पीएचसी को रुख कर जाते हैं।
गांव-गांव बने सेंटर पर तैनात एएनएम रिटायर होती जा रही हैं। शासन की ओर से एएनएम की भर्ती नहीं निकाली जा रही है। ऐसे में 155 सेंटर पर एएनएम की तैनाती नहीं हो पाई है। सीएचसी-पीएचसी पर तैनात स्टाफ नर्स को एएनएम सेंटर पर भेजकर काम चलाया जा रहा है।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।