ब्लॉक प्रमुख बनने का मंसूबा पाले लोगों का सपना चुनाव जीतने के बाद जरूर साकार हो गया है, लेकिन उन्हें इस कुर्सी पर बैठने के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। दरअसल, पुराने ब्लॉक प्रमुखों और बीडीसी सदस्यों का कार्यकाल अभी 17 मार्च तक है। ऐसे में नवनिर्वाचित ब्लॉक प्रमुखों को कुर्सी पर आसीन होने के लिए अभी करीब 37 दिन इंतजार और करना होगा। अगर सरकार की कृपा नहीं बरसी तो इन ब्लॉक प्रमुखों को एमएलसी चुनाव में मतदान करने से भी हाथ धोना पड़ सकता है। फिलहाल, नवनिर्वाचित ब्लॉक प्रमुखों की नजर अब ब्लॉक की गतिविधियों पर है।
जिले के 17 विकास खंडों में रविवार को चुने गए ब्लॉक प्रमुखों की नजर अब कुर्सी पर टिक गई है। ब्लॉक प्रमुखों के घर सोमवार को यह आम चर्चा रही कि शपथ ग्रहण कब होगा और के सत्ता की चाभी उनकी जेब में कब आएगी। अगर विधिक रूप से सब कुछ चलता रहा तो 17 मार्च के बाद ही नए प्रमुखों की ताजपोशी होगी। हालांकि, सरकार को अधिकार है कि 17 मार्च से पहले ही वह नए ब्लॉक प्रमुखों को अधिकार सौंप सकती है। सरकार की कृपा नवनिर्वाचित ब्लाक प्रमुखों और बीडीसी सदस्यों पर बरसी तो एमएलसी चुनाव के पहले भी वह प्रमुख की कुर्सी पर अपना कब्जा जमा सकते हैं।
अगर सरकार ने पूर्व प्रमुखों और बीडीसी सदस्यों के कार्यकाल में दखल नहीं दिया तो नवनिर्वाचित बीडीसी सदस्य और प्रमुखों को एमएलसी चुनाव से भी हाथ धोना पड़ सकता है। वह पांच साल तो अपना कार्यकाल निभाएंगे, मगर एमएलएसी चुनाव में शामिल नहीं हो पाएंगे। ऐसा इसलिए होगा कि एमएलसी का चुनाव प्रत्येक छह वर्ष के अंतराल पर होता है, जबकि बीडीसी सदस्य और ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल पांच वर्ष के लिए ही होता है। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि पूर्व ब्लाक प्रमुखों और बीडीसी सदस्यों का कार्यकाल 17 मार्च तक है। अभी तक शासन से शपथग्रहण के बारे में कोई जानकारी मिली नहीं है। उन्होंने बताया कि शासन का आदेश आते ही अगला कदम उठाया जाएगा।