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मैडम रह रहीं पति के साथ में, छुट्टी बच्चे की देखभाल में

Mon, 08 Feb 2016 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में तैनात शिक्षिकाओं को चाइल्ड केयर लीव देने में व्यापक स्तर पर खेल किया जा रहा है। सेटिंग पर नौकरी करने वाली शिक्षिकाएं खंड शिक्षा अधिकारियों को मोटी रकम देकर उनका मुंह बंद कर देती हैं। विभाग के इस खेल में वह भी अध्यापिकाएं लाभ उठा रही हैं, जो नसबंदी करा चुकी है।
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बेसिक शिक्षा विभाग में अधिकांश अध्यापिकाएं ऐसी हैं जो सेटिंग पर नौकरी कर रही हैं। उनकी नौकरी की सुरक्षा की जिम्मेदारी खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने सिर पर ले रखी है। आलम यह है कि अधिकांश अध्यापिकाएं ऐसी हैं जिनके पति बाहर नौकरी करते हैं। ऐसे में वह भी अपने पति के साथ रहती हैँ। वह किस स्कूल में तैनात हैं, इस बात की जानकारी उन्हें स्वयं नहीं होती है, मगर ऑनलाइन उनके खाते में वेतन पहुंच रहा है। ऐेसे में उनके बचाव का हथियार चाइल्ड केयर लीव है। प्रसव और उसके उपरांत बच्चों की देखभाल के लिए एक शिक्षिका को अधिकतम छह माह का अवकाश मिलता है। पूरी नौकरी के दौरान अधिकतम दो वर्ष का अवकाश ले सकती हैं। मगर इस अवकाश में अंतराल होना आवश्यक होता है। इसलिए बीईओ अवकाश को रजिस्टर में अंकित ही नहीं करते हैं।

चाइल्ड केयर लीव पहले बीएसए स्वीकृत करते थे। मगर बीते वर्ष से यह अधिकार खंड शिक्षा अधिकारियों को मिल गया है। आलम यह है कि कितनी शिक्षिकाओं ने चाइल्ड केयर लीव का अवकाश लिया है, इसकी अधिकारियों को जानकारी ही नहीं हो पाती है। ऐसा इसलिए होता है कि बीईओ इसकी जानकारी बीएसए कार्यालय भेजते ही नहीं हैं। इससे छह माह का अवकाश पूरा होते ही पुराने प्रार्थना पत्र को फाड़कर नया स्वीकृत कर दिया जाता है।
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कालाकांकर और मानधाता से इस तरह की शिकायत आने के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने जांच कराना उचित नहीं समझा। अगर गोपनीय जांच कराई जाए तो इस खेल में लगभग साढ़े तीन सौ से अधिक अध्यापिकाओं और खंड शिक्षा अधिकारियों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है।


चाइल्ड केयर लीव लेने वाली शिक्षिकाओं का विवरण खंड शिक्षा अधिकारियों के कार्यालय में भी नहीं होता है। वह अपनी डायरी शिक्षिकाओं का विवरण रखते हैं। ऐसी शिक्षिकाओं का मोबाइल नंबर भी होता है। पूर्व बीएसए एसटी हुसैन ने औचक निरीक्षण में चार ऐसी शिक्षिकाओं को पकड़ा था और उनकी सेवा समाप्त कर दी थी। 
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