सबसे पहले बदमाशों ने छोटेलाल पर किया था हमला
शुक्रवार की रात बदमाशों ने धावा बोलकर मकान के बाहर छज्जे के नीचे सो रहे छोटेलाल के ऊपर ही हमला किया था। इसके बाद घर में घुसकर तांडव मचाया। बदमाशों के पैरों के निशान अभी भी घर के पीछे मौजूद हैं। रविवार को भी घर में जगह-जगह खून के निशान मौजूद मिले। अंतिमा से लेकर सुनीता के पैर से गिरा खून कपड़ों पर भी नजर आया। दीवारों पर भी खून के छीटें हैं। घटना की जानकारी के बाद पहुंची सुनीता की मां रेखा के आंसू नहीं थम रहे हैं।
शिक्षक परिवार बना सहारा, घर में नहीं जला चूल्हा
डकैती की वारदात के बाद पुलिस भले ही घटना को पहले चोरी और बाद में लूट बताती रही। मगर बदमाशों के खौफनाक तरीके से किए हमले से परिवार के लोग चूल्हा जलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे में उनके लिए शिक्षक राजेंद्र पाल का परिवार सहारा बनकर खड़ा है। आने जाने लोगों को नाश्ता पानी कराने के साथ ही परिवार के लोगों को खाने का इंतजाम भी कर रहे हैं। रविवार को पहुंचे भीम आर्मी भारत एकता मिशन के जिला संयोजक प्रदीप राज बौद्ध्, छात्र संघ के जिला संयोजक विकास भारतीय पवन पासी, सरवन कुमार, अमित कुमार, ओम प्रकाश ने परिजनों से बातचीत के बाद पुलिस से खुलाने की मांग की।
अंतिमा के बयान से चकरा रही पुलिस
गयासपुर खजुरिया में बदमाशों ने छोटेलाल पर धावा बोला। छत के रास्ते घर में घुसते समय रसोई में अंतिमा चारपाई पर सोती मिल गई। परिवार के अन्य सदस्य दूसरे कमरे में थे। अंतिमा का कहना है कि उसकी चारपाई पर बैठा बदमाश हाथ में असलहा लिया था। बदमाश के जगाने पर उसकी नींद खुली। उसके हाथ में तमंचा देख वह डर गई। बदमाश ने बाल पकड़कर उसे दो थप्पड़ जड़ दिए। शांत रहने की हिदायत देते हुए नीचे चला गया। इस बीच मौका पाकर वह छत से नीचे कूद गई।
घर में मिला 315 असलहे के कारतूस का खोखा
पुलिस बदमाशों द्वारा गोली मारने की घटना से इनकार कर रही थी। जबकि घर से ही 315 बोर के असलहे के कारतूस का खोखा मिला। सुनीता के बाएं पैर में घुटने के नीचे पंजे में सटाकर गोली मारी गई थी। पुलिस ने खोखा बरामद भी किया, लेकिन बताने से इन्कार कर रही है। हालांकि अभी उसका ऑपरेशन कर बुलेट नहीं निकाली जा सकी। आशंका जताई जा रही है कि बदमाश चार पहिया वाहन से आए थे।
बदमाशों की बातचीत अजीब थी
खौफजदा अंतिमा का कहना है कि जो बदमाश लूटपाट कर रहे थे। उनकी बातचीत यहां के लोग जैसे नहीं थी। बदमाशों ने कहा था कि शोर मचाओगी तो जान से मारन देंगे। यही नहीं साथ रही महिला भी ऐसा ही कुछ कह रही थी कि जल्दी- जल्दी माल निकालों, नही तो मार दें। मां रेखा देवी कहती रही कि साबह हमार गदेल ठीक होई जाएं समान तो फिर बनाय लेब। घटना के बाद से दुकान भी बंद रही।