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Pratapgarh News: ईंट भट्ठा संचालक के हत्यारोपियों से पुलिस की मुठभेड़, सुपारी किलर के पैर में लगी गोली

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रामगंज बाजार स्थित ईंट भट्ठा संचालक मोनू सिंह की गोली मारकर हत्या करने वाले सुपारी किलर और उसके साथियों से रविवार की रात पुलिस से मुठभेड़ हो गई। शूटर के पैर में गोली लगी, जबकि घटना की साजिश में शामिल दो आरोपी भी पुलिस के हाथ लगे। मुंबई के मकोका अपराधी ने ईंट भट्ठा संचालक की हत्या के लिए एक लाख में सुपारी दी थी।
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जेठवारा थाना क्षेत्र के पर्वतपुर निवासी मोनू सिंह को चार अगस्त की रात रामगंज बाजार स्थित ईंट भट्ठे पर अज्ञात लोगों ने गोली मार दी। उपचार के दौरान घायल मोनू सिंह की मौत हो गई। मृतक के भाई सोनू सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस हत्यारोपियों की तलाश कर रही थी। रविवार की रात जेठवारा थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह व स्वाॅट टीम प्रभारी सुनील यादव ने हत्या की वारदात में शामिल आरोपियों को पकड़ने के लिए धनसारी तिराहे पर पहुंचे। पुलिस को देख फायरिंग करते हुए बाइक सवार तीन बदमाश भागने लगे। पुलिस टीम घेराबंदी करते हुए जवाबी फायरिंग की। गोली सुपारी किलर बलापुर खुर्दहा निवासी अनिल पटेल के दाहिने पैर में लगी। जिससे वह गिर पड़ा। भाग रहे रामगंज बाजार निवासी राजेंद्र पटेल उर्फ बचौली व नगीहा पर्वतपुर निवासी विकास को पकड़ लिया। उनके पास से हत्या में प्रयुक्त एक पिस्टल व दो तमंचा, मोबाइल व बाइक बरामद हुई। गोली लगने से घायल अनिल को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे प्रयागराज रेफर कर दिया। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी संजय राय के अनुसार पूछताछ में अनिल पटेल ने बताया कि मृतक मोनू सिंह व रामगंज बाजार निवासी धर्मेंद्र पटेल साझेदारी में ईंट भट्ठा चलाते थे। मृतक ब्याज पर रुपये भी देता था। धर्मेंद्र के भाई राजेंद्र उर्फ बचोली के मध्यस्तता पर उनके चचेरे भाई सतीश पटेल को मोनू ने करीब एक साल पहले पांच प्रतिशत ब्याज पर चार लाख रुपये दिए थे। ब्याज का रुपया नहीं देने पर मोनू सिंह अक्सर राजेंद्र व सतीश से अभद्रता करता। बाजार में भी गाली गलौज किया करता था। ऐसे में मोनू सिंह की हत्या के लिए उसे एक लाख रुपये की सुपारी दी गई। उसने चार अगस्त को मौका पाकर ईंट भट्ठे पर मोनू सिंह के सिर में दो गोली मारी। उसे मरा समझकर भाग निकला। हत्या की सुपारी देने वाला सतीश महाराष्ट्र से फरार मकोका अपराधी है। उसके ऊपर हत्या, लूट समेत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसकी तलाश में पुलिस टीम दिल्ली भेजी गई है। पकड़े गए राजेंद्र व विकास को जेल भेज दिया गया।
बाजार में ब्याज के रुपये को लेकर सरेआम करता था अभद्रता
पूछताछ में यह भी सामने आया कि लोगों को मोनू सिंह पांच प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज पर रुपये दिया करता था। राजेंद्र ने खुद तीन लाख और अपने चचेरे भाई सतीश को चार लाख रुपये ब्याज पर दिलाए थे। राजेंद्र तो अपना ब्याज व रुपये भी जमा कर दिया करता था लेकिन सतीश रुपये देने में आनाकानी करने लगे। जिसे लेकर अक्सर मृतक लोगों के सामने अपशब्दों का प्रयोग करते हुए बाजार में अभद्रता करता था। जिससे परेशान होकर सतीश पटेल व राजेंद्र ने मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची।
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विकास के घर में रखा गया था असलहा
सतीश ने अपने किसी करीबी के माध्यम से मोनू सिंह की हत्या के लिए तीन माह पहले पिस्टल व असलहे भेजे। काम न होने पर असलहे विकास के घर में छिपाकर रख दिए गए। बाद में राजेंद्र ने सतीश से बात कराकर अनिल को मोनू की हत्या के लिए तैयार कर लिया। उसे पहले दिया गया दस हजार रुपये पेशगी के रूप में रखने को कहा गया। काम होने के बाद 90 हजार रुपये देने की बात कही गई।
तेरही से पहले घटना का हो गया खुलासा
ईंट भट्ठा संचालक मोनू सिंह की हत्या के बाद परिजन आरोपियों की धरपकड़ करने वाली पुलिस की कार्यप्रणाली से काफी नाराज थे। पुलिस ने तेरही व श्राद्ध से पहले ही घटना का खुलासा करते हुए आरोपियों को जेल भेजा।
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