बारिश नहीं होने से जिले के किसान परेशान हैं। धान की रोपाई भी कम हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि देरी से धान की रोपाई होती है तो धान का उत्पादन करीब 20 फीसदी तक घट जाएगा। धान की रोपाई का उचित समय 25 जुलाई तक होता है। मगर पानी के अभाव में किसानों की सभी तैयारियां फेल हो गई हैं।
जिले में सूखे जैसे हालात को देखते हुए धान का रकबा 42 हजार हेक्टेयर घटाकर 1.09 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। जबकि बीते साल धान का रकबा 1.51 लाख हेक्टेयर था। बारिश नहीं होने के कारण घटा हुआ धान की रोपाई का लक्ष्य भी पूरा होना मुश्किल लग रहा है।
जुलाई में 303 मिमी के सापेक्ष महज 110 मिमी बारिश दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि धान की रोपाई 25 जुलाई तक कर देने से भरपूर फसल तैयार होती है। लेकिन मौसम की बेरुखी ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं।
नहरों ने भी छोड़ा साथ
बारिश की बेरुखी के बीच नहरों ने भी किसानों का साथ छोड़ दिया है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 318 नहरों, रजबहों से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है लेकिन अभी तक 120 नहरों में ही पानी छोड़ा गया है। नहरों का पानी टेल नहीं पहुंच सका है। जिससे धान की रोपाई प्रभावित हुई है।
जुलाई में बारिश काफी कम हुई है। जिस कारण धान की रोपाई प्रभावित हुई है। देरी से धान की रोपाई पर 20 तक उत्पादन घटेगा। अभी तक जिले में 45 फीसदी धान की रोपाई हो सकी है।
अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी