सिर्फ एक जिपं सदस्य निरक्षर, मतदान के लिए मिलेगा सहयोगी
चार जिला पंचायत सदस्यों ने मांगा था सहयोगी, जांच के बाद तीन के आवेदन हुए निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। शनिवार को होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए सिर्फ एक सदस्य को सहयोगी दिया जाएगा। जांच के बाद तीन जिला पंचायत सदस्यों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। इन लोगों ने नामांकन दाखिल करने के दौरान हस्ताक्षर किए थे। केवल एक महिला प्रत्याशी निरक्षर मिली है।
जिले में कुल 57 जिला पंचायत सदस्य हैं। तीन जुलाई को यह सदस्य जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। इनमें चार जिला पंचायत सदस्यों ने अनपढ़ होने का हवाल देते हुए निर्वाचन अधिकारी से मतदान के लिए सहयोगी की मांग की थी। तीन जिला पंचायत सदस्य जांच में खरे नहीं उतरे। उन्होंने नामांकन के दौरान आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर किया था। केवल बिहार पंचम से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य बिटोन देवी ने अंगूठा लगाया था। इसकी वजह से जिला प्रशासन ने बिटोन देवी को मतदान के लिए परिवार के किसी करीबी सदस्य को सहयोगी के रूप में साथ जाने की अनुमति दी है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत एसपी बर्नवाल ने बताया कि केवल एक सदस्य को मतदान के लिए सहयोगी दिया जाएगा।
बागियों ने बढ़ाई मुसीबत, निर्दलीय तय करेंगे नतीजा
जादुई आंकड़े को छूने के लिए निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों के पाले में करने के लिए हो रहे हर जतन
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। तीन जुलाई को होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। लड़ाई सपा, भाजपा और जनसत्ता दल के बीच है, लेकिन इस बीच बागी जिला पंचायत सदस्यों ने पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है। तीनों दल 40 सदस्यों के साथ होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें भितरघात और क्रास वोटिंग का डर सता रहा है। ऐसे में निर्दल जिलां पंचायत सदस्यों की भूमिका बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष का परिणाम तय करने में उनकी अहम भूमिका होगी।
57 सदस्यों की जिला पंचायत में बोर्ड गठित करने के लिए 29 का जादुई आंकड़ा छूना जरूरी है। त्रिकोणीय लड़ाई में फंसी जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जे के लिए किसी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। सबसे अधिक सपा के 17 जिला पंचायत सदस्य हैं, जबकि भाजपा समर्थित छह और राजाभैया की पार्टी जनसत्ता दल के 12 सदस्य हैं। इस तीनों दलों के बीच ही अध्यक्ष की सीट पर कब्जे के लिए लड़ाई है। सत्ताधारी भाजपा सिर्फ छह सदस्य होने के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर हर हाल में कब्जा जमाना चाह रही है। वही वजह है कि इस चुनाव में काबीना मंत्री मोती सिंह के साथ सांसद संगमलाल गुप्ता और विधायक धीरज ओझा ने पूरी ताकत लगा रखी है। इसके बाद भी भाजपा की राह आसान नजर नहीं आ रही है। सिर्फ छह सदस्यों वाली भाजपा ने सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है। जोड़-तोड़ का खेल चरम पर है, लेकिन पार्टी के सामने कई चुनौतियां आ रही हैं। हालांकि भाजपा नेताओं का दावा है कि कोई भी सदस्य पार्टी के सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ा है। जीत हासिल करने वाले अधिकांश जिला पंचायत सदस्य भाजपा से जुड़े हैं। ऐसे में पार्टी आसानी से जिला पंचायत में अपना बोर्ड बना लेगी। सबसे ज्यादा 17 सदस्यों वाली सपा के सामने मुसीबत भी ज्यादा है। उसे अपने सदस्यों को पार्टी के साथ खड़े रख पाने में मशक्कत करनी पड़ रही है। पार्टी भितरघात और क्रास वोटिंग की आशंका से परेशान है। हालांकि सपा नेता भी दावा कर रहे हैं कि अध्यक्ष उनका ही होगा। दूसरी तरफ, कांग्रेस के पांच जिला पंचायत सदस्यों का साथ मिलने के बाद पूर्व काबीना मंत्री और कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया की पार्टी जनसत्ता दल के पास भी अब 17 सदस्य हैं। अंदरखाने में चर्चा है कि सपा के कई अन्य सदस्य भी सीधे राजाभैया के संपर्क में हैं। इसके अलावा जनसत्ता दल ने निर्दल सदस्यों को भी साधने के लिए पूरा जोर लगा रखा है। ऐसे में भाजपा और सपा की चुनौतियां बढ़ गई हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो तीन जुलाई को ही पता चलेगा, लेकिन कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी के खुलकर साथ आने और अपनी सधी सियासत से राजाभैया ने भाजपा और सपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि जोड़-तोड़ कीे इस खेल में अब निर्दलीय जिला पंचायत सदस्यों की अहमियत काफी ज्यादा बढ़ गई है। जिस दल ने उन्हें साध लिया, जिला पंचायत अध्यक्ष भी उसी का होगा।
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तीन सुरक्षा घेरे में होगा मतदान, डायवर्ट होगा रूट
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव तीन जुलाई को अफीम कोठी में होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी डा. नितिन बंसल की मौजूदगी में 57 सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अफीम कोठी जाने वाले रास्ते पर पुलिस का सख्त पहरा रहेगा। तीन सुरक्षा घेरे में अध्यक्ष पद का चुनाव कराने की तैयारी है। मुख्य गेट पर एसडीएम सदर, एक सीओ, दो थानेदार, महिला थानेदार मौजूद रहेंगी। मतदान स्थल से सौ मीटर की दूरी पर लगे बैरियर पर एक सीओ, तीन थानाध्यक्ष मौजूद रहेंगे। वह सदस्यों का प्रमाण पत्र देखने के बाद ही सदस्यों को मतदान के लिए अंदर जाने देंगे। इस दौरान रूट डायवर्ट रहेगा।
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चार घंटे होगा मतदान, दोपहर 3.30 बजे तक आ जाएगा परिणाम
जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव शनिवार को केवल चार घंटे तक होगा। सुबह 11 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक सदस्य मतदान कर सकेंगे। मतदान समाप्त होने के बाद वहीं मतों की गणना होगी। करीब साढ़े तीन बजे तक परिणाम आने की संभावना है। मतदान करने वाले सदस्य मतपत्रों को बैलेट बॉक्स में डालेंगे। मतदान के बाद मतपत्रों की छंटाई होगी। इसके बाद उनकी गिनती कराई जाएगी।