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ट्रामा सेंटर, अस्पताल की मिली सौगात

Thu, 20 Oct 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
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आईसीयू में पंखा - फोटो : अमर उजाला
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सीटी स्कैन के लिए इलाहाबाद का चक्कर काटने वाले गरीब लोगों के लिए दीपावली पर राहत भरी खबर है। शासन ने जिला अस्पताल में डेढ़ महीने बाद सीटी स्कैन शुरू करने का आदेश दिया है। इस पर अमल भी शुरू कर दिया गया है। अभी तक जिले के सरकारी अस्‍पतााल लमें इसकी सुविधा कहीं नहीं थी। उधर, रानीगंज में 12.50 करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। चलाकपुर में 35 करोड़ की लागत से 100 बेड का अस्पताल बनेगा। देल्हूपुर, हरिपालमऊ और औवार के निकट पृथ्वीगंज में स्थित पीएचसी को उच्चीकृत कर अब सीएचसी का दर्जा दिया जाएगा।
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जनपद के सरकारी अस्पतालों में अभी तक न्यूरो के चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। इसके चलते मारपीट हो या फिर सड़क हादसे में सिर में चोट लगने के बाद मरीजों को इलाहाबाद ले जाने के सिवाए कोई दूसरा चारा नहीं बचता था। ऐसे मरीजों को जिले के डाक्टर तत्काल इलाहाबाद के लिए रेफर कर देते हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रो. शिवाकांत ओझा ने अपने गृह जनपद की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सिटी स्कैन की व्यवस्था डेढ़ माह के अंदर करने के लिए कहा है। उधर, स्वास्थ्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र रानीगंज में 12.50 करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर का निर्माण किया जाएगा। 35 करोड़ की लागत से चलाकपुर गांव में 100 बेड का अस्पताल खोलने की भी शासन ने मंजूरी दे दी है। इसी के साथ ही देल्हूपुर में पीएचसी, हरफालमऊ पीएचसी और औवार पृथ्वीगंज पीएचसी को सीएचसी बनाने की मंजूरी मिल गई है।

कहीं एक्सरे और बर्न यूनिट जैसा न हो जाए हाल
शासन के फरमान पर जिले में सीटी स्कैन शुरू होने को लेकर लोगों के मन में तमाम शंकाए भी हैं। दरअसल अभी तक जिले में एक भी न्यूरो के डाक्टर नहीं हैं। ऐसे में सवाल है कि सीटी स्कैन करेगा कौन। हालांकि जिला अस्पताल प्रशासन का दावा है कि जल्द ही न्यूरो चिकित्सक की तैनाती की जाएगी। अगर अस्पतालों पर नजर दौड़ाएं तो हालात बेहद खराब नजर आते हैं। जिला अस्पताल के साथ ही जनपद भर के सीएचसी में एक्सरे मशीन लगी हुई हैं, लेकिन मगर रेडियोलाजिस्ट न होने के कारण करीब तीन वर्ष से एक्सरे नहीं हो रहा है। मरीजों को प्राइवेट में चार से पांच सौ रुपये शुल्क जमा करके निजी सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि मंत्रीजी को पहले अस्पताल में खाली पड़े चिकित्सकों की कुर्सी भरनी चाहिए।  जिला अस्पताल में बर्न वार्ड की दशा बेहद खराब हो गई है। चार बेड का वार्ड जरूर बना हुआ है मगर न तो एसी लगी है और न ही कूलर। इतना ही नहीं चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती भी नहीं हुई है। उसमें आशा ज्योति केन्द्र का संचालन हो रहा है। जबकि जले मरीज इलाज और गर्मी से परेशान हो रहे हैं। उधर मर्चरी में शव रखने के लिए फ्रीजर रखा गया है। मगर वह आज तक नहीं चला।
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