57 हजार परिवारों को शौचालय दिया ही नहीं, जिला खुले में शौच से मुक्त
विभाग की लापरवाही से लाभार्थियों का नहीं हो सका था चयन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिला भले ही ओडीएफ घोषित हो गया है, मगर अभी जिले के 57,000 परिवारों को शौचालय बनाने के लिए रकम मिलेगी। विभाग की लापरवाही के चलते इन लाभार्थियों का चयन अभी तक नहीं हो पाया था। दरअसल, विभाग ने 1,09,000 परिवारों को छूटा हुआ तो बता दिया, मगर 52,000 लाभार्थियों की ही सूची मुहैया कराई थी।
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत जिले को 31 दिसंबर 2018 को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। मगर इसके बाद भी शौचालय के लाभार्थियों का चयन और धनराशि भेजने का दौर जारी है। शासन ने एक जनवरी 2019 को पत्र भेजकर ऐेसे परिवारों की संख्या मांगी, जो बेसलाइन सूची से वंचित हो गए थे। जिला प्रशासन ने 1,09,000 परिवारों के वंचित होने की जानकारी भेज दी। जब लाभार्थियों की सूची मांगी तो महज 52,000 लाभार्थियों का नाम दिया गया। 52,000 लाभार्थियों को शौचालय बनाने के लिए धनराशि प्रधानों और सचिव के खाते में भेजने के बाद 57,000 लाभार्थियों की और सूची मांगी गई तो सभी के कान खड़े हो गए। हालांकि तब तक डीपीआरओ का तबादला हो चुका था। विभाग ने जब शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया तो पता चला कि विभाग ने 1,09,000 की संख्या के अनुरूप धनराशि की मांग केंद्र सरकार से की गई थी जो प्राप्त हो चुकी है। ऐसे में लाभार्थियों की सूची अपलोड की जाए। तब विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटी और 57,000 लाभार्थियों की खोज के लिए अभियान चलाया गया।
नकद भुगतान का प्रधान कर रहे हैं विरोध
शौचालय का निर्माण कराने की जिम्मेदारी लाभार्थियों पर थोपने से प्रधान इसका विरोध कर रहे हैं। अभी तक प्रधान और सचिवों पर शौचालय बनाने की जिम्मेदारी थी। डीपीआरओ ने जो नई व्यवस्था बनाई है, उसके मुताबिक प्रधान और सचिव के खाते में शौचालय की धनराशि जाएगी। चयनित लाभार्थी को चेक के माध्यम से भुगतान किया जाएगा।
जिले में छूटे हुए 57,000 परिवारों को अभी शौचालय का निर्माण कराने के लिए धनराशि दी जाएगी। अगर किसी को शौचालय नहीं मिला है तो वह प्रधान, सचिव से मिलकर अपना नाम अंकित करा दें। अगर ग्राम प्रधान विरोध कर रहा है तो एक प्रार्थना पत्र सम्बंधित ब्लाक के एडीओ पंचायत को अवश्य दें।
लालजी दूबे, डीपीआरओ।