अधिवक्ता ओम मिश्र के हत्यारोपी मुस्तफा को पूछताछ के दौरान हालत बिगड़ गई। जिससे पुलिस अफसरों के साथ ही उसे हिरासत में लेने वाले पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। आनन-फानन में उसे उपचार के लिए पुलिसकर्मी लेकर अस्पताल भागे लेकिन मीडिया की नजरों से बचने के लिए बीच रास्ते से ही प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां भी हालत में सुधार होता न देख पुलिसकर्मी लेकर प्रयागराज रवाना हुए। वहां निजी अस्पताल में उपचार कराया गया। हालत में सुधार होने के बाद उसे लेकर पुलिसकर्मी भोर में लौटे। अब उसे जेठवारा थाने में रखा गया है। हालांकि पुलिस ऐसी घटना से इनकार कर रही है।
महेशगंज के कलिकापुर निवासी अधिवक्ता ओम मिश्र की 15 जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के भाई ने चार नामजद व दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमे बेलाही निवासी रऊफ व लाला का पुरवा के प्रधानपुत्र महेंद्र यादव को पुलिस ने कुछ दिनों बाद दबोचकर जेल भेज दिया। नामजद आरोपी समीर व मुस्तफा निवासी बेलाही फरार चल रहे थे। गत दिनों एसटीएफ ने दबोच लिया लेकिन उसे अभी तक सामने नहीं लाया। इधर जेठवारा पुलिस के हत्थे 25 हजार का इनामी मुस्तफा चढ़ गया। जिसे पुलिस लाइन में पूछताछ के लिए लाया गया। सूत्रों की मानें तो सोमवार को पूछताछ के दौरान ओम मिश्र हत्याकांड व दरोगा राम बहादुर की पिस्टल लूटने के मामले में पुलिस अफसर और पुलिसकर्मी लगातार पूछताछ करते रहे। जिससे वह बेहोश हो गया। यह देख पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए।
आला अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। पहले तो उसे जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी थी लेकिन प्रकरण मीडिया में आने के भय से पहले शहर के तीन प्राइवेट अस्पतालों में ले जाया गया। वहां भी उसकी हालत में सुधार न हुआ तो पुलिसकर्मी उसे लेकर प्रयागराज भागे। जहां प्राइवेट अस्पताल में मुस्तफा का उपचार कराया गया। हालत में सुधार होने पर पुलिसकर्मी उसे लेकर भोर में लौट आए। अब उसे जेठवारा थाने में रखा गया। अब पुलिसकर्मी उससे पूछताछ करने से किनारा कस लिए हैं। हालांकि जेठवारा थानाध्यक्ष का कहना है कि जब मुस्तफा को पकड़ा ही नहीं गया तो पिटाई का सवाल ही नहीं उठता।