मजदूरों का पलायन रोकने के लिए अब कृषि, उद्यान, लोकनिर्माण विभाग, सिंचाई, भूमि संरक्षण इकाई, लघु सिंचाई विभागों के लिए मनरेगा का बजट दिया जाएगा।
यह विभाग जिस ग्राम पंचायत में विकास कार्य कराएंगे, वहां उसी गांव के जॉब कार्डधारक मजदूरी कर सकेंगे। शासन की इस मंशा के पीछे गांव के मनरेगा मजदूरों को अधिकाधिक रोजगार मुहैया कराना है।
मुंबई, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा से आने वाले मजदूरों का पलायन रोकने के लिए शासन ने अन्य विभागों से भी मनरेगा का कार्य कराने की रणनीति बनाई है। नहर और सड़क की पटरी बनाने के लिए विभाग अब ठेकेदारों से काम नहीं करा सकेंगे।
बल्कि जिस ग्राम पंचायत में वह कच्चा कार्य कराएंगे, वहां के जॉब कार्डधारकों से मिट्टी का कार्य भी कराना होगा। अभी तक विभाग ठेकेदारों से सेटिंग करके जेसीबी से मिट्टी फेंकवाते थे और मजदूर दिखाकर भुगतान करते थे। भूमि संरक्षण इकाई, लघु सिंचाई विभाग को भी अब मजदूरों के खाते में भुगतान करना होगा।
डीएम ने गुरुवार को सभी विभागों के अफसरों के साथ बैठक करके युद्ध स्तर कार्य प्रारंभ कराने को कहा है। डीएम ने कहा कि विभाग पक्का कार्य अपने बजट से कराएंगे और मजदूरी का भुगतान मनरेगा से किया जाएगा।
अभी तक मनरेगा का कार्य सिर्फ ग्राम पंचायतें करा रही थीं, मगर अब अन्य विभागों को भी शामिल किया जा रहा है। काम कराने के बाद मजदूरों के खाते में आनलाइन भुगतान किया जाएगा।
अजय कुमार पांडेय, डीसी, मनरेगा