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लोहंदाकांड: एसआईटी ने एक मुकदमे में लगाई चार्जशीट

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कौशाम्बी के लोहंदाकांड की जांच करने के लिए गठित एसआईटी ने एक मुकदमे में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। अभी दो मुकदमों की विवेचना जारी है। घटना की जांच के लिए एक निरीक्षक, एक महिला निरीक्षक व उपनिरीक्षक को जिम्मेदारी मिली है।
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प्रयागराज जोन के अपर पुलिस महानिदेशक संजीव गुप्ता ने कौशाम्बी के सैनी थाने में दर्ज लोहंदा कांड की तीन एफआईआर की विवेचना के लिए 21 जून को प्रतापगढ़ एसपी को एसआईटी गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए थे। घटना को लेकर पहली एफआईआर 28 मई को जागेश्वर पाल की शिकायत पर दर्ज हुई। इसमें बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की धाराएं लगी हैं। दूसरी 04 जून को अक्षय कुमार तिवारी की तहरीर पर दर्ज की गई। तीसरी एफआईआर 05 जून को दर्ज हुई, जिसमें लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम व सीएलए एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
एडीजी के आदेश पर पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने टीम गठित करते हुए निरीक्षक सत्येंद्र सिंह, महिला निरीक्षक सरस्वती निगम व उपनिरीक्षक रवींद्र यादव को जिम्मेदारी दी। एसआईटी ने सभी मामलों से जुड़े दस्तावेज प्राप्त करने के बाद जांच प्रारंभ की।
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दुष्कर्म के मामले में जेल भेजे गए बेटे को बेकसूर बताते हुए पिता रामबाबू ने थाने के बाहर जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इसे लेकर बवाल हुआ और 06 जून को मृतक के बेटे अक्षय तिवारी की तहरीर पर थाना सैनी में दुष्कर्म पीड़िता के पिता, प्रधान भूप नारायण पाल, भाई और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसी मामले की विवेचना करते हुए एसआईटी ने प्रधान व दुष्कर्म पीड़िता के पिता व भाई के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया है। अभी दुष्कर्म पीड़िता व पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे की विवेचना जारी है।
लोहदा कांड पर एक नजर
कौशाम्बी में 28 मई को एक 8 साल की मासूम ने अपने पिता के साथ सैनी थाने में रेप सहित पॉक्सो एक्ट का केस दर्ज कराया।



तत्कालीन इंस्पेक्टर बृजेश करवरिया व चौकी प्रभारी ने आरोपी सिद्धार्थ उर्फ धन्नू को गिरफ्तार कर 29 मई को जेल भेज दिया।



आरोपी सिद्धार्थ के पिता रामबाबू तिवारी ने 04 जून को बेटे को निर्दोष बताते हुए सैनी थाने के बाहर जहर खा लिया, जिससे उनकी मौत हो गई।



रामबाबू की मौत से परिवार व ग्रामीणों में उबाल आ गया। नाराज लोगों ने रामबाबू का शव नेशनल हाईवे पर रखकर 05 जून को जाम लगा दिया।



प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंची पुलिस टीम ने जाम खत्म कराने की कोशिश में लाठियां चलाईं जिसमें कई लोग घायल हुए।



मामला तूल पकड़ते ही सैनी इंस्पेक्टर समेत 2 दरोगा निलंबित कर दिए गए। सीओ सिराथू का तबादला दूसरी सर्किल में कर दिया गया।


06 जून को मृतक राम बाबू के बेटे अक्षय तिवारी की तहरीर पर रेप पीड़िता के पिता समेत गांव के प्रधान भूप नारायण पाल, भाई विपिन पाल एवं एक अन्य पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ।


एसपी राजेश कुमार ने 09 जून को रेप के आरोपी सिद्धार्थ पर लगे आरोप को झूठा बताया। इसके लिए उन्होंने पीड़ित बच्ची के अदालत में दिए गए बयान को आधार माना।
पुलिस ने सिद्धार्थ पर दर्ज मुकदमे में गंभीर धाराएं हटा लीं, जिसके चलते अदालत ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया। वह 09 जून की शाम जेल से छूट कर अपने घर आ गया।
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रेप का मुकद्दमा दर्ज कराने वाले बेटी के पिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जेल में ही बंद रखा गया।



21 जून को लोहंदा कांड में एडीजी प्रयागराज ने कौशाम्बी पुलिस की गठित एसआईटी से जांच प्रतापगढ़ एसपी को ट्रांसफर कर दी थी।
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