क्षेत्र के हंडौर में सावित्री शैक्षणिक एवं समाज कल्याण समिति के बैनर तले 24वां राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और मुशायरा संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत शासकीय अधिवक्ता आलोक त्रिपाठी, डॉ. शक्ति कुमार पांडेय ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की।
कवि सम्मेलन का आगाज सुरेश नवीन की वाणी वंदना से हुई। इसके बाद लखीमपुर खीरी रंजना सिंह हया ने इक नजर तुझको देखने आई हूं मैं, देख लूं इक नजर फिर चली जाऊंगी पर लोग झूम उठे।
सुल्तानपुर की सपना मिश्रा ने बांधूंगी नहीं आज तुमको प्रिया से लोगों को आध्यात्म से जोड़ा। हास्य कवि निर्झर प्रतापगढ़ी ने जय गुंडा काका, तोहरे भय से कांपे गांव गली नाका...से वर्तमान परिस्थितियों पर व्यंग्य किया। शायर कृष्ण कांत कामिल, रोहित विश्वकर्मा ने प्रस्तुतियां दीं।
इस मौके पर राकेश सिंह, गड़बड़ सुल्तानपुरी, हुमा अक्सीर, डॉ. अंजनी अमोघ, फैयाज परवाना, विशाल श्रीवास्तव, बिहारी लाल अंबर, चंद्र शेखर विकास, आशुतोष दीपक, बिहारी लाल अंबर मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत अविनाश पांडेय, संजय शुक्ल, ज्ञान प्रकाश शुक्ल, महेश तिवारी, श्याम जी जायसवाल, अभय प्रताप सिंह ने किया।