प्रधानमंत्री की महात्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना में भी गड़बड़ी करने से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बाज नहीं आए। योजना के संचालन के लिए उपकरणों को लगाने व मरम्मत के नाम पर लाखों रुपये का खेल किया गया है। मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी ने जांच बैठा दी है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं प्रशासन के साथ ही जिला कोषागार अधिकारी को जांच सौंपी गई है।
आयुष्मान भारत योजना के संचालन में लाखों रुपये की अनियमितता बरतने का मामला सामने आया है। जिला स्तरीय अधिकारियों की नाक के नीचे यह कारनामा होता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी। मेडिकल कॉलेज के आयुष्मान वार्ड के संचालन में व्यापक पैमाने पर अनियमितता बरतते हुए सरकारी धनराशि का बंदरबांट किया गया है। महिला अस्पताल में बने आयुष्मान वार्ड एसी नहीं लगा है। मगर स्वास्थ्य विभाग के कागजों पर तीन-तीन एसी लगाए जा चुके हैं।
एसी की मरम्मत के नाम पर भी सरकारी धनराशि का गबन किया गया है। वार्ड व कर्मचारियों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था के नाम पर भी लाखों का खेल हुआ है। कंप्यूटर मरम्मत के नाम पर भी कर्मचारियों ने मनमानी करते हुए लाखों रुपये हजम कर लिए। कुछ कर्मचारियों द्वारा रुपये अपने खाते में भी ट्रांसफर किए गए हैं। करीब डेढ़ लाख रुपये का लेंस मरीजों को कागजों पर ही लगाया गया है। जबकि इतनी संख्या में मरीजों का ऑपरेशन ही नहीं हुआ है।
मामला संज्ञान में आने के बाद जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने जांच बैठा दी दी है। उन्होंने जिला कोषागार अधिकारी व अपर जिलाधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से अभिलेख तलब किए हैं। अपर जिलाधिकारी सुनील कुमार शुक्ला ने बताया कि आयुष्मानप योजना के संचालन में अनियमितता की जांच की जा रही है। अभिलेखों की छानबीन की जा रही है।