जिले के प्रधानों को खाता संचालन के लिए डोंगल का रजिस्ट्रेशन कराने और पासवर्ड जारी करने के लिए पांच-पांच हजार रूपये की वसूली हो रही है। ब्लाक से डीपीआरओ कार्यालय तक हो रही वसूली रोकने के लिए कोई पहल नहीं हो रही है। कर्मचारियों की जेब नहीं भरने वाले प्रधानों को पासवर्ड देने के लिए परेशान किया जा रहा है।जिले में 702 ग्राम पंचायतों के संगठित होने के बाद खाता खुलने की कार्रवाई ब्लाक के माध्यम से प्रारंभ हुई है।
आनलाइन भुगतान होने से प्रधानों की डिजिटल सिग्नेचर का रजिस्ट्रेशन डीपीआरओ कार्यालय में करके पासवर्ड दिया जाता है। इन दिनों डीपीआरओ की तबियत खराब चल रही है। इससे विभागीय कर्मचारी मनमानी पर उतर आए हैं। आलम यह है कि डिजिटल सिग्नेचर का रजिस्ट्रेशन और पासवर्ड के लिए पांच-पांच हजार रूपये की मांग हो रही है। जो प्रधान नहीं दे रहे हैं, उन्हें परेशान किया जा रहा है। जिले के 17 ब्लाकों के सिर्फ 26 प्रधानों का ही खाता आनलाइन शो कर रहा है।
अधिकांश ब्लाकों में एडीओ पंचायत के माध्यम से और आसपास के ब्लाकों में सीधे कर्मचारी वसूली कर रहे हैं। प्रभारी डीपीआरओ और सदर के एडीओ पंचायत उमेश व्दिवेदी जब इस बावत बात की गई, तो पहले उन्होंने कहा कि पांच नहीं बल्कि दो हजार लिए जा रहे हैं। बाद में उन्होंने कहा कि यह रूपये डिजिटल सिग्नेचर के लिए हैं। अगर कोई प्रधान बाहर से बनवाकर देता है, तो उसे रूपये देने की जरूरत नहीं है।
सदर एडीओ पंचायत बने प्रभारी डीपीआरओ
डीपीआरओ के बीमार होने से सीडीओ ने सदर ब्लाक के एडीओ पंचायत उमेश व्दिवेदी को प्रभारी डीपीआरओ नामित किया है। हालांकि उन्हें बैठकों में प्रतिभाग करने और पत्राचार करने का ही अधिकार दिया गया है।