आम आदमी को सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र खुद बीमार हैं। इन केंद्रों पर जरूरी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इसका फायदा सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक उठा रहे हैं। मरीजों को महंगी और कमीशन वाली दवाएं लिखी जा रही हैं। इससे मरीजों को इलाज कराना भारी पड़ रहा है।
पांच साल पहले शासन ने जनपद के सीएचसी के साथ ही जिला और महिला अस्पताल में जन औषधि केंद्र खोलने का निर्देश दिया गया था। जिससे मरीजों को सस्ते दर पर दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक मरीजों को बाहर से कमीशन की दवाएं खरीदने के लिए मजबूर न कर सकें। पांच साल बीत जाने के बाद भी जिले में सिर्फ मेडिकल कॉलेज के संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पुरुष और महिला विंग (पहले जिला अस्पताल) के साथ रानीगंज सीएचसी में जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू हो सका। बीच में डेढ़ साल तक तीनों जन औषधि केंद्र बंद रहे।
विधानसभा चुनाव के बाद फिर से इनके संचालन के लिए हरी झंडी मिली मगर, सिर्फ नाम के लिए ही इनका संचालन किया जा रहा है। जन औषधि केंद्रों पर 258 दवाएं रखने का निर्देश है लेकिन, वर्तमान समय में सिर्फ 40 से 70 दवाएं ही उपलब्ध हैं। सर्जिकल सामान एक भी नहीं हैं। ऐसे में मरीज परेशान हो रहे हैं। राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के पुरुष और महिला विंग के जन औषधि केंद्र संचालक मोनू ने बताया कि चिकित्सक ज्यादातर बाहर की दवाएं लिखते हैं।
ऐसे में मरीज दवाएं खरीदने के लिए जन औषधि केंद्र पर बहुत कम आते हैं। इसलिए दवाएं नहीं खरीदी जा रही हैं। ज्यादा दिन तक दवाएं रखने के बाद उनके एक्सपायर होने का भी खतरा बना रहता है। बीते दिनों दवाएं एक्सपायर होने की वजह से साढ़े सात लाख का नुकसान हुआ।
कई बार सीएमएस से बात कर चिकित्सकों को जन औषधि केंद्र की दवा लिखने के लिए कहा गया मगर, उन्होंने ध्यान नहीं दिया। कमीशन के फेर में डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखते हैं। उधर, रानीगंज के जन औषधि केंद्र के संचालक गुड्डू पांडेय ने बताया कि दवाओं के लिए आर्डर दिया गया है। अभी एजेंसी दवाएं नहीं मुहैया करा पा रही है।
रेफरल सेंटरों में नहीं खुल सके प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
जिले के सीएचसी और पीएचसी की तो बात तो दूर रेफरल सेंटर पट्टी, लालगंज और कुंडा में जन औषधि केंद्र नहीं खोले जा सके। कई सीएचसी में जन औषधि केंद्र के संचालन के लिए लोगों ने आवेदन किए लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने उसे रद्दी टोकरी में डाल दिया। इसके चलते मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का लाइसेंस लखनऊ की एक संस्था जारी कर रही है। जन औषधि केंद्र का लाइसेंस लेकर आने वाले लोगों को अस्पताल परिसर में जगह मुहैया कराई जा रही है। लाइसेंस लेने के बाद भी लोग क्यों नहीं आ रहे हैं, इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। रही बात दवाओं की तो संस्था को पत्र भेजकर अस्पतालों में संचालित जन औषधि केंद्रों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए कहा जाएगा। डॉ. एसके सिंह, एसीएमओ