स्टेशन से रोजाना 12 ट्रेनें धड़-धड़ाकर गुजरती हैं, लेकिन रुकती सिर्फ एक है। वह भी पीआरएल पैसेंजर ट्रेन। यात्रियों को दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज या फिर वाराणसी जाना हो तो उन्हें 15 किमी दूर मां बेल्हादेवी जंक्शन जाना पड़ता है।
20 करोड़ की लागत से जगेशरगंज स्टेशन का कायाकल्प रेलवे ने किया। एक लूप लाइन सहित दो प्लेटफॉर्म, फुट ओवरब्रिज और यात्री शेड तैयार कराया गया है। ट्रेनों के ठहराव के लिए स्थानीय लोगों ने डीआरएम का घेराव तक किया लेकिन उन्हें मिला सिर्फ आश्वासन।
सांसद डॉ. एसपी सिंह पटेल ने सदन में ट्रेन ठहराव का मुद्दा उठाया, मगर आज तक पीआरएल छोड़कर दूसरी ट्रेनों का ठहराव नहीं हो सका। उनके पत्र पर अभी रेल विभाग के जिम्मेदार विचार ही कर रहे हैं। डीआरएम सुनील वर्मा ने कहा, कुछ दिन पहले कार्यभार ग्रहण किया है। मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। लेकिन, रेलवे बोर्ड को पत्र भेजकर जरूरी ट्रेनों का ठहराव कराने का प्रयास किया जाएगा।
बुधवार को ग्रामीणों ने डीआरएम को संबोधित ज्ञापन स्टेशन मास्टर को सौंपा था। लखनऊ-वाराणसी, कानपुर इंटरसिटी, जौनपुर इंटरसिटी, काशीविश्वनाथ और जनता एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के ठहराव की मांग की है।
बोले लोग
ट्रेन से कहीं जाना होता है तो पहले डग्गामार वाहनों से सफर तय करना पड़ता है। प्रतापगढ़ या फिर अंतू स्टेशन से ट्रेन पकड़नी पड़ती है।
राजेंद्र,
कई बार घेराव किया गया, चौपाल लगाई गई। मगर रेल अफसर जगेशरगंज स्टेशन पर ट्रेन ठहराव न करने की जैसे कसम खा लिए हैं।
सत्यनारायण,