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पुरुषों से ज्यादा एड्स की चपेट में महिलाएं

Fri, 10 Jun 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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- फोटो : ANI
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‘असुरक्षित यौन संबंध से बचें। कंडोम का प्रयोग करें। संक्रमित खून और संक्रमित सुइयों का प्रयोग न करें। गर्भवती महिलाओं की एचआईवी की जांच कराएं। एड्स लाइलाज है। जानकारी ही बचाव है।.....’
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सरकारी-निजी अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सार्वजनिक जगहों पर हम ये लाइनें हर रोज पढ़ते हैं। डाक्टर भी यही सलाह देते हैं। इस बीमारी की रोकथाम के लिए सरकारें भी लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं। बावजूद इसके एड्स पीड़ितों की लगातार बढ़ती संख्या हैरान और परेशान करने वाली है। एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थिरेपी) सेंटर के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों से ज्यादा इस जानलेवा बीमारी की चपेट में महिलाएं हैं। पिछले दो सालों में पीड़ित महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। पीड़ितों में सिर्फ गरीब और कम पढ़े लिखे ही नहीं बल्कि कई लखपति और करोड़पति लोग भी शामिल हैं।

एड्स (एक्वॉयर्ड इम्यूनो डिफिसिएंसी सिन्ड्रोम) जैसी भयानक बीमारी से पार पाना अभी भी चिकित्सा जगत के लिए चुनौती बना हुआ है। जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर के प्रभारी सीनियर मेडिकल अफसर डा. राकेश त्रिपाठी के मुताबिक इस रोग का इलाज संभव नहीं है। हां दवाओं और काउंसिलिंग के जरिए मरीज स्वस्थ्य जीवन जी सकता है। सेंटर पर मार्च 2011 से अब तक कुल 7925 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 3479 पुरुष, 3837 महिलाएं, 354 बालक और 255 बालिकाएं शामिल हैं। इनमें प्रतापगढ़ के अलावा सुल्तानपुर, अमेठी और जौनपुर के सीमावर्ती इलाकों के कुछ मरीज भी शामिल हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह वे मरीज हैं जो एआरटी सेंटर पर रजिस्ट्रेशन कराकर नियमित काउंसिलिंग और दवा करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में ऐसे भी मरीज हैं जो कहीं और इलाज करा रहे हैं या फिर हर दिन घुट-घुट कर मर रहे हैं। पिछले दो सालों में एड्स पीड़ित महिलाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
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साल दर साल एड्स पीड़ितों की बढ़ती संख्या पर एक नजर
वर्ष              पुरुष      महिलाएं       बालक         बालिकाएं
2011-12      233     280           23             03
2012-13      560     628           65             36
2013-14      747     825           28             54
2014-15      964    1069         118             84
2015-16      975    1035         120            178

जागरूकता अभियान पर सवालिया निशान
एड्स से बचाव और लोगों को जागरूक करने के लिए सरकारें और और कुछ संगठन लगातार अभियान जरूर चला रहे हैं, मगर देखने वाली बात यह है कि इसका लोगों पर असर कितना हो रहा है। साल दर साल लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या और बेकाबू होती बीमारी के चलते इन अभियानों पर भी प्रशभनचिह्न खड़ा हो गया है। अगर लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है तो फिर मरीजों की संख्या में इजाफा कैसे हो रहा है। जाहिर है सिर्फ कागजों, दीवारों और सार्वजनिक जगहों पर तक ही ये अभियान सिमटकर रहे गए हैं।

अवैध संबंधों के चलते बढ़ रहे मरीज
डाक्टरों के मुताबिक एड्स पीड़ितों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं जो रोजगार के सिलसिले में मुंबई, दिल्ली, गुजरात जैसी जगहों पर बाहर रहते थे। लंबे समय से घर से दूर और अकेले रहने के कारण इन लोगों ने वहां अवैध शारीरिक संबंध बनाए। जिससे बीमारी की चपेट में आ गए। बाद में उनकी पत्नी भी बीमारी की गिरफ्त में आ गई। कुछ ऐेसे भी थे जिन्होंने वेश्याओं से संबंध बनाए। जिससे संक्रमण की चपेट में आए। बाद में इन लोगों ने घर लौटने के बाद यहां भी कई महिलाओं से अवैध संबंध स्थापित किए और उन्हें भी बीमारी बांट दी। अवैध संबंध के चलते रिश्तों का तो ताना-बाना टूटा ही बीमारी भी मिल गई।

होमोसेक्सुअलिटी और लेस्बियन के भी मामले
डाक्टर और परामर्शदाताओं की मानें तो प्राकृतिक सेक्स की जगह होमोसेक्सुअलिटी के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है। होमोसेक्सुअलिटी और लेस्बियन के चलते बीमारी की चपेट में आए मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है। कुछ ऐेसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें एड्स पीड़ित व्यक्ति ने अपनी बीमारी छिपाते हुए दूसरे से अवैध संबंध बनाया और उन्हें भी बीमारी दे दी। एड्स पीड़ित मरीजों में कुछ स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं।

शादी से पहले कराएं एचआईवी की जांच
शादी से पहले लड़का-लड़की दोनों की एचआईवी जांच जरूर कराएं। इससे दोनों की जिंदगी बर्बाद होने से बचाई जा सकेगी। एआरटी सेंटर पर दो ऐसे मामले आए थे जिनमें बाहर रहने वाले दो युवक एचआईवी पाजीटिव होने के बाद भी बीमारी छुपाकर यहां आकर शादी रचाने जा रहे थे। एआरटी सेंटर पर जांच होने के बाद मामला खुला तो बवाल खड़ा हो गया। किसी तरह शादी रोकी गई। ऐन वक्त पर पता चलने के कारण दो युवतियों की जिंदगी बर्बाद होने से बच गई।

एचआईवी पीड़ित चार लोगों की कराई शादी
एड्स से पति की मौत होने के बाद गुमनामी की जिंदगी जी रहीं दो महिलाओं को एआरटी सेंटर से सहारा मिला। बीमारी का पता चलने के बाद इन महिलाओं से उनके अपने भी कन्नी काटने लगे थे। सेंटर के लोगों ने इन महिलाओं की एचआईवी पाजीटिव उन पुरुषों से शादी कराई जो बीमारी से पत्नी की मौत के बाद अकेले जीवन जी रहे थे। अब सभी खुशी से अपनी जिंदगी जी रहे हैं।
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